कैथल। जिला नगरिक अस्पताल में गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अब जल्द ही बड़ी राहत मिलेगी। यहां जल्द ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को यह सुविधा पीपीपी मोड दी जाएगी। इसके जरिये मरीजों को निजी अस्पतालों में तो चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा ही, साथ में उनके धन और समय की भी बचत होगी।
तीन निजी अस्पतालों में है इस समय डायलिसिस की सुविधा:-शहर में इस समय तीन निजी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा है। जिसमें शुरुआती डायलिसिस के लिए करीब 2500 रुपये की राशि खर्च होती है। दोबारा या इसके बाद करवाने पर भी करीब 1200 रुपये तक की राशि वसूली जाती है। जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा करीब 600 रुपये में दी जाएगी।
निजी कंपनी के विशेषज्ञ करेंगे काम:-स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार अस्पताल प्रबंधन ने इस कार्य के लिए एक निजी कंपनी को चयनित किया है। कंपनी में नर्सिंग स्टाफ से लेकर तकनिशियन, एलटी, डॉक्टर व अटेंडेंट कंपनी के ही होंगे। अस्पताल में सेंटर में काम कर रहे कंपनी के एक कर्मचारी ने बताया कि जांच के लिए मशीनें लगाने से संबंधित व अन्य उपकरणों को लगाने का कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है। प्रयास रहेगा कि इस माह के अंत यह सुविधा मिल सके।
मात्र 600 रुपये रहेगी फीस:-अस्पताल में इस सुविधा का लाभ लेने के लिए मात्र 600 रुपये एक बार की फीस देनी होगी। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर आदेश नहीं आए हैं कि फीस कितनी निर्धारित है। लेकिन यह बताया जा रहा है कि करीब 600 रुपये में यह सुविधा दी जाएगी। फीस के अलावा किसी प्रकार का अतिरिक्त चार्ज मरीज से नहीं लिया जाएगा। इसके तहत मरीजों की जांच करना, खून की सफाई करना व अन्य कार्य किए जाएंगे। असपताल प्रबंधन की ओर से केवल बिजली, पानी व जगह ही कंपनी को दी जाएगी, बाकि सब चीजें कंपनी की ओर से खुद जुटाई जाएंगी। वहीं सुविधा के दौरान होने वाली आय भी कंपनी को ही मिलेगी।
सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने कहा कि जिलावासियों को यह सुविधा इसी महीने के अंतिम सप्ताह तक मिलने की संभावना है। अस्पताल प्रंबंधन का प्रयास है कि सुविधा जल्द से जल्द लोगों को उपलब्ध करवाई जाए। करीब छह सौ रुपये में यह सुविधा मरीजों को दी जाएगी।
गुर्दे की बीमार में होती है डायलिसिस की जरुरत:-अस्पताल इंचार्ज डा. दिनेश कुमार व शाह अस्पताल में डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि डायलिसिस एक तरह का टेस्ट होता है। जो किडनी की बीमारी में होता है। इसमें किडनी की एक तरह से सफाई की जाती है। गुर्दे जब का करना बंद कर दें तो उसमें काफी राहत मरीज को मिल जाती है।