कैथल। सिटी स्कवायर में दर्ज एफआईआर में कार्रवाई की मांग को लेकर 15 पार्षद व प्रतिनिधियों ने सोमवार को नगर परिषद कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। साथ ही पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पार्षद सामूहिक तौर पर डीसी को अपने इस्तीफे सौंप देंगे। पार्षदों ने सिटी स्कवायर मामले में जिला प्रशासन पर ढीली कार्रवाई करने का आरोप लगाया। इसके साथ स्थानीय निकाय विभाग के मुख्य सचिव पर इस मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाया। वहीं धरने के पहले दिन हरियाणा सरकार के एक और सुधार प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने भी समर्थन दिया।
सोमवार को पहले दिन धरने की अगुवाई पार्षद राकेश सरदाना व पार्षद प्रतिनिधि धर्मबीर भोला ने की। धरने के दौरान पार्षदों ने जिला प्रशासन पर जानबूझकर कोई संतोषजनक कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
धर्मबीर भोला ने कहा कि आज भ्रष्टाचार के आरोपियों के खिलाफ धरना शुरू किया गया है। धरने लगाकर एक सप्ताह तक आरोपियों की गिरफ्तार का इंतजार किया जाएगा। यदि एक सप्ताह तक आरोपियों की गिरफ्तार सहित अन्य संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो धरना देने वाले सभी पार्षद सामूहिक रूप से डीसी डॉ. प्रियंका सोनी को अपने पद का इस्तीफा देंगे। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इससे भी बड़ा कदम उठाया जाएगा। भोला ने कहा कि सीएम फ्लाइंग की जांच के बाद सरकार के आदेशों पर सिटी थाना में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर ली गई। लेकिन इससे आगे जांच नहीं बढ़ पाई है जो केवल जिला प्रशासन के कारण हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार के मामले में निकाय के मुख्य सचिव भी शामिल है जो पुलिस को इस पर कड़ी कार्रवाई करने नहीं दे रहे है। जांच में पुलिस के सामने आरोपियों के खिलाफ दस्तावजे भी साक्ष्य हैं। लेकिन उसके बावजूद स्थानीय प्रशासन कोई कारवाई नहीं कर रहा है।
वहीं नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि नगर परिषद के अधिकतर अधिकारी आम जन को सुविधा देने में भी असमर्थ हैं। अभी तक नप के अधिकारियों से पीएमवाईके की फाईलें तक पूरी नहीं की गई है। जिससे आम जनता परेशान हैं। वे कई बार नप के कार्यालयों के चक्कर तो लगा चुके है। लेकिन उनका काम पूरा नहीं हो पाया है। सरकार तो आम जनता को सुविधाएं देना चाहती है। लेकिन नीचे स्तर के अधिकारी आम जनता के कार्य पूरे नहीं कर रहे हैं।
यह पार्षद रहे मौजूद
सोमवार को पहले दिन के धरने में नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति, पार्षद राकेश सरदाना, संतोष भोला, प्रवीन शर्मा उर्फ काला सांघन, निशा गर्ग, आशा रानी, बृज मोहन सिंगला, नरेश मित्तल, दीपक शर्मा, कुलदीप सैनी, गोपाल सैनी, विनोद सोनी, पार्षद प्रतिनिधि वरूण मित्तल, भीम सेन अग्रवाल, काका सचदेवा, प्रवीन सिंगला, संजय गर्ग, धर्मबीर भोला सहित अन्य मौजूद रहे।
मुख्य कार्यालय को सौंपी रिपोर्ट
डीएसपी कुलभूषण ने कहा कि सिटी स्कवायर मामले में जांच रिपोर्ट के दस्तावेज स्थानीय निकाय विभाग के कार्यालय को सौंप दिए गए है। अब विभाग के आला अधिकारियों के निर्देशों के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की जा सकेगी। अभी तक जांच को लेकर विभाग के कार्यालय से कोई आदेश नहीं आए हैं।
यह है मामला
वर्ष 2018 की मार्च में शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट को 36 करोड़ रुपये की लगात से बनाने के लिए सरकार के अप्रूअल मिलने के बाद कार्य शुरू हुआ था। जो करीब छह महीने के बाद ही पार्षद प्रवीण सरदाना व अन्य ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत की।
25 मार्च को हुआ था चेयरपर्सनी सीमा कश्यप सहित 11 के खिलाफ मामला
पुलिस ने गुप्तचर विभाग के पत्र अनुसार मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की रिपोर्ट के आधार पर 25 मार्च 2019 को केस दर्ज किया था। नगर परिषद चेयरपर्सन सीमा कश्यप, ईओ विक्रम सिंह, सचिव कुलदीप सिंह, एमई राजकुमार शर्मा, एमई सुमित मलिक, एमई मुकेश शर्मा, एमई रमेश वर्मा, जेई प्रदीप गुप्ता, जेई हवा सिंह, जेई मोहित सहित ठेकेदार शशांक गर्ग के खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ है। जिसमें 38 करोड़ रुपये का टेंडर छोड़ने में नियमों की अवहेलना, टेंडर के बाद एजेंसी को करोड़ों का गलत तरीके से भुगतान करने के आरोपों के तहत भ्रष्टाचार, साजिश व धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।