इस वर्ष देवउठनी एकादशी पर नहीं है विवाह के मुहूर्त : शांडिल्य
- अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है इस दिन को विवाह के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। गुरु अस्त होने के कारण इस वर्ष 19 नवंबर को पड़ने वाली देवउठनी एकादशी पर शहनाइयां नहीं बजेंगी। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि देवउठनी एकादशी को विवाह के लिए अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। लेकिन इस बार देवउठनी एकादशी पर गुरु का तारा अस्त स्वरूप में रहेगा जिसके कारण विवाह मुहूर्त नहीं बनेगा।
उन्होंने बताया कि विवाह मुहूर्त सुनिश्चित करने में त्रिबल शुद्धि अर्थात चन्द्र, गुरु और शुक्र की महती भूमिका होती है। विवाह के दिन चंद्र, गुरु व शुक्र का गोचरवश शुभ स्थानों में होना परम आवश्यक है। त्रिबल शुद्धि के साथ ही विवाह मुहूर्त में गुरु व शुक्र के तारे का उदित स्वरूप होना भी आवश्यक है। गुरु व शुक्र का तारा यदि अस्त है तो विवाह का मुहूर्त नहीं निकलेगा। हिंदू परंपरा के अनुसार सामान्यत: देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक विवाह को निषेध माना गया है। पर देवउठनी एकादशी पर बिना पंचांग की सलाह लिए ही विवाह कर्म किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सोमवार 12 नवंबर कार्तिक शुक्ल पंचमी को गुरु पश्चिम में अस्त हो गया है। जो 7 दिसंबर दिन शुक्रवार मार्गशीर्ष अमावस्या को पूर्व में उदय होगा। चूंकि देवउठनी एकादशी इसके दौरान आ रही है इसलिए विवाह कार्य की हमारे ग्रंथ इजाजत नहीं देते।