‘फसल अवशेष खेत में दबाने से बढ़ती है भूमि की ताकत’
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अमर उजाला ब्यूरो
सीवन। कृषि विज्ञान केन्द्र कैथल एवं प्रगतिशील किसान क्लब कैथल की ओर से वीरवार को फसल अवशेष प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। कृषि विज्ञान के प्रमुख वैज्ञानिक डा. देवेंद्र चहल एवं डा. जसबीर ने किसानों को संकल्प दिलाया कि धान के अवशेषों को खेत में दबाएंगे व अवशेषों को नहीं जलाएंगे।
डा. देवेंद्र चहल ने इस अवसर पर कहा कि फसल अवशेष खेत में दबाने से भूमि की ताकत बढ़ती है व जैविक कार्बन बढ़ता है। मित्र कीट सुरक्षित रहते हैं। पराली जलाने से लोग बीमार हो रहे हैं। गले की बीमारी, बुखार, आंखों में जलन व दमे के रोगियों के लिए बहुत ही जीवन कठिन हो रहा है। उन्होंने किसानों को सब्जी उत्पादन एवं बाग लगाने के लिए प्रेरित किया। अगला समय बाग का ही है। बाग में प्रति एकड़ पैदावार 200 क्विंटल तक हो जाती है। फलों का मूल्य गेहूं धान से अधिक होता है। किसान के बाग लगाने से उनकी आय कई गुणा बढ़ सकती है। डॉ. जसबीर ने गेहूं कि किस्में, खरपतवार नियंत्रण व प्रबंध व्यवस्था के बारे में बताया। प्रगतिशील किसान क्लब के प्रधान लक्ष्मी आनंद ने बताया कि पिछले वर्ष जिन खेतों में पुआल का दबाया गया था उनमें अन्य की अपेक्षा अच्छी पैदावार मिली है। मेजर सिंह मलिक ने फार्म पर पहुंचे सभी किसानों व वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया इस अवसर पर सुरेन्द्र जाजनपुर, प्रेम सिंह खेड़ी राय वाली, अशोक गोयल, उदय फिरोजपुर, रामेश्वर मलिकपुर, जसमेर, जस्सी व देसराज मलिकपुर सहित सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।