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रोडवेज कर्मचारियों को लेकर जारी इश्तेहार हताशा व भ्रम फैलाने का प्रयास

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रोडवेज कर्मचारियों को लेकर जारी इश्तेहार हताशा व भ्रम फैलाने का प्रयास
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कैथल। कई जनसंगठनों ने 16-17 अक्तूबर की रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। साथ ही रोडवेज कर्मचारियों को लेकर जारी इश्तेहार को हताशा और भ्रम फैलाने की असफल कोशिश बताया है।
सीटू के माध्यम से संगठनों की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जनता अच्छी तरह जानती है कि कर्मचारी 10-12 साल से अपने वेतन, भत्ते या दूसरी मांगों के लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि रोडवेज को बर्बाद किए जाने से बचाने और युवाओं के रोजगार के लिए लड़ रहे हैं। यदि बार-बार हड़ताल या चक्का जाम जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा है तो इसके लिए भी सरकार जिम्मेदार है। वह समझौता करके उस पर अमल नहीं करती और बेशर्मी के साथ निजीकरण करने पर तुली हुई है।
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रोडवेज कर्मचारी चाहते हैं कि आबादी के अनुपात में 14 हजार बसें चलाई जाएं। ऐसा करने पर हर गांव तक बस जा सकती है। उच्च शिक्षा के लिए शहर में आने वाले छात्रों, विशेषकर लड़कियों का आना-जाना आसान हो जाएगा और 70 हजार युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। जनसंगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों पर बल प्रयोग किया या एस्मा के तहत कार्रवाई की तो जनता के सभी तबके संघर्ष में कूदने के लिए बाध्य होगी। बैठक में सीटू, एसएफआई. मिड डे मील, आशा वर्कर्स यूनियन, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व उससे जुड़ी यूनियनें, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन रिटायर्ड कर्मचारी संघ के पदाधिकारी शामिल हुए।
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