पिता, दादा और चाचा की परंपरा को बढ़ा रहे आगे
श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में पिछले 48 वर्षों से चले आ रहे रामलीला में कई कलाकार अदा कर रहे अपने पूर्वजों का रोल
फोटो नंबर-21 व 22
कमल बहल
कैथल। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में पिछले 48 वर्षों से चले आ रहे श्री गणेश ड्रामाट्रिक क्लब के मंच में कई ऐसे कलाकार हैं, जो अपने बाप और दादा द्वारा शुरू की गई परंपरा को संजोए हुए है। यहां रामलीला मंचन वर्ष 1971 में शुरू हुआ था। वर्तमान में मंच पर श्रीराम व रावण का पात्र अदा कर रहे कलाकार अपने बाप और चाचा द्वारा शुरू किए गए रोल को खुद बखूबी निभा रहे हैं। इनका कहना है कि जब उनके पिता, दादा या चाचा मंच पर अपनी प्रस्तुति देते थे तो उन्हें देखकर उन्हें भी मंच पर आने की ललक होती थी। पहले वे गली नुक्कड़ में होने वाली रामलीला में रोल करते थे। इसके बाद ही उन्हें इस बड़े मंच पर आने का मौका मिला।
श्री गणेश ड्रामाट्रिक क्लब के रामलीला मंचन में राम का रोल कर रहे चन्नी ने बताया कि वह पिछले 28 साल से इस मंच पर विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाई है। पहले वे भरत का रोल अदा करते थे। इस बार राम का पात्र निभा रहे हैं। उन्होंने अपने पिता रामकुमार जांगड़ा को राम का रोल अदा करते हुए देखा था। उस समय काफी गर्व महसूस होता था। बाद में रामलीला मंचन में प्रस्तुति की ओर कदम बढ़ाया तो इस मंच पर श्रीराम का रोल अदा करनेे का मौका मिला।
रावण का रोल अदा कर रहे गौरव शर्मा उर्फ जुगनू ने बताया कि उन्हें पिछले तीन वर्षों से मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिला है। उसके ताऊ लक्ष्मी नारायण ने इस मंच पर कई पात्रों में भूमिका निभाया है। उनके पिता गिरधारी लाल शर्मा ने शहर के दूसरे सबसे बड़े कुरुक्षेत्र गोशाला के मंच पर परशुराम का रोल अदा किया है। जुगनू ने बताया कि उनके पिता व ताऊ की प्रस्तुति से उन्हें मंच पर आने का रास्ता मिला। जिसके बाद रावण का रोल अदा करने वाले जगजीत सिंह व सतपाल से उन्हें रावण के पात्र को बखूबी निभाने की प्रेरणा मिली। सोशल रूप से बढ़ रहे मीडिया व टीवी के दौर में लोगों की रुचि कम हुई। लेकिन इस पर सरकार कलाकारों को प्रोत्साहन देते हुए कार्य करे।
24 वर्षाें से राम का रोल अदा कर रहे शुगर मिल में कार्यरत फीडर : सीवन के बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में शुगर मिल में कार्यरत फीडर जोगिंद्र शर्मा पिछले 24 वर्षों से श्रीराम का किरदार निभा रहे हैं। शर्मा ने बताया कि वह कैथल को-ऑपरेटिव शुगर मिल में फिटर के पद पर नौकरी करते हैं। रामलीला के लिए वे कुछ दिनों की छुट्टी लेते हैं और कुछ दिन काम पर जाते हैं। दिन में रिहर्सल करते हैं और रात को रामलीला खेलते हैं। उन्होंने बताया कि रामलीला में भाग लेकर उन्हें लगता है कि वह एक पवित्र कार्य कर रहे हैं। वे एक सांस्कृतिक धरोहर को जिंदा रखने में सहयोग कर रहे हैं।