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जिला अस्पताल में ईलाज करवाने के लिए भटकना पड़ता है तीन दिनों तक

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जिला अस्पताल में इलाज करवाने के लिए तीन दिनों तक पड़ता है भटकना
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टेस्ट करवाने में आ रही है ज्यादा समस्या, डॉक्टर ने यदि एक टेस्ट लिखा तो पांच बार लगना पड़ता है लाइन में
फोटो संख्या-11
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को एक बीमारी के इलाज के लिए उस स्थिति में कई दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं, जब डॉक्टर कोई टेस्ट लिख देता है। इसके लिए मरीज को कम से कम पांच बार लाइन में लगना पड़ता है। अस्पताल में खून देने के लिए समय बारह बजे तक निर्धारित है। इसके बाद आने वाले मरीजों को सीधा अगले दिन आने का फरमान सुनाया जा रहा है। जिस कारण अधिकतर मरीजों मायूस होकर लौट जाते हैं।
अस्पताल में दाखिल मरीज टेक सिंह लांबा खेड़ी, बिटू चीका, केरसिंह बरोट, विक्रम गढी, जोनी सेक्टर-बीस ने बताया कि यहां सुबह आठ बजे आएं हुए हैं। पहले तो पर्ची बनवाने में लाइन में लगकर काफी देर तक खड़ा होना पड़ता है। दूसरा यहां लाइन में लगकर भी नंबर नहीं आता। उन्होंने बताया कि घर से सुबह निकलना पड़ता है, लेकिन इलाज न होने पर मायूस होकर घर लौटना पड़ता है। सारा दिन इंतजार करने के बावजूद भी इलाज न होने से मरीजों को काफी परेशानी होती है।
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रे बेटा तीन होगे आंदे इब तक नंबर नहीं आया : जिला अस्पताल में खून चेकअप के लिए आई कवारतन निवासी प्रकाशो, सीमा कोटड़ा, अनिता ने हरियाणवी अंदाज में कहा कि रे हाम तो तीन दिन होगे अस्पताल के चक्कर काट रे सै इब तक नी खून चैक होया म्हारा। उन्होंने कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये अपने चहेते को अंदर बुलाते हैं और उनका नंबर पहले लगवा कर साइड वाले कमरे से निकाल देते हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। जो सुबह से लाइनों में जहां खड़े हैं वो वहीं रह जाते हैं।
दिव्यांगों व गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं है अलग व्यवस्था : शहर निवासी मदनलाल ने बताया कि यहां दिव्यांगों व गर्भवती महिलाओं के लिए अलग लाइन की व्यवस्था न होने के कारण उनको काफी मुसीबतों से गुजरना पड़ता है। दिव्यांग पहले ही काफी पीड़ा में होता है दूसरा यहां लाइन में लगना पड़ता है। ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है।
जिला अस्पताल के सभी वार्डों में हो टोकन सिस्टम : पूंडरी के गांव बरसाना निवासी संदीप ने बताया कि अस्पताल के सभी ओपीडी वार्डों में टोकन सिस्टम होना चाहिए। जिससे मरीजों को भीड़ से काफी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि जो मरीज जिस समय पर आएगा उसको टोकन मिल जाएगा। उससे पहले कोई दूसरा व्यक्ति इलाज के लिए अंदर नहीं जा सकेगा। वही व्यक्ति अंदर जाएगा जिसके पास टोकन होगा।
दोपहर 12 बजे तक लिया जाता है ब्लड सैंपल : जिला अस्पताल मेें कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। उसके बाद रिपोर्ट तैयार करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन से इसका समय एक घंटा और बढ़ा दिया है। पहले ये 11 बजे तक ही था।
ये है प्रक्रिया : मरीज को सबसे पहले रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए, फिर यदि टेस्ट लिख दिया तो खून का सैंपल देने के लिए, यदि 2 बजे तक रिपोर्ट न आए तो अगले दिन फिर आना पड़ता है। फिर टेस्ट रिपोर्ट लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद दवा के लिए लाइन में लगना होता है। तब जाकर इलाज शुरू हो पाता है।
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12 बजे तक ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। एक मरीज के कम-से-कम दस टेस्ट किए जाते हैं, जिनकी वजह से समय लगता है। अगर कोई मरीज एक बजे के बाद पर्ची बनवाता है तो उसको अगले दिन आना पड़ेगा।
डॉ. आरडी चावला, पीएमओ जिला अस्पताल कैथल।
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