गैर बीपीएल मरीज की किस्मत हो तो ही बचते हैं 2000 रुपये
जिला अस्पताल में ऑपरेशन करवाने वाले गैर-मरीजों की व्यथा, अन्यथा उसे करना पड़ता है निजी डॉक्टर की सेवाओं के लिए भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिला अस्पताल में ऑपरेशन करवाने वाले गैर बीपीएल मरीजों की किस्मत हो तो उनके 2000 रुपये बच जाते हैं। यदि अस्पताल इंचार्ज एवं बेहोशी के डॉक्टर डा. ओमप्रकाश व्यस्त हैं तो उन्हें 2000 रुपये का भुगतान निजी डॉक्टर की सेवाओं के लिए करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि गैर बीपीएल मरीज भी गरीब है तो उस पर यह बोझ क्यों डाला जा रहा है? इसके अलावा शुक्रवार को अस्पताल में हुए विवाद के बाद हड्डियों का ऑपरेशन करवाने वाले सभी मरीजों की अचानक छुट्टी पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग में यह मामला दिन भर चर्चा का विषय बना रहा और कई कर्मचारी व अधिकारी अब जांच पूरी होने के इंतजार में हैं।
जिला अस्पताल में इंचार्ज डा. ओमप्रकाश खुद बेहोशी के डॉक्टर हैं। लेकिन यहां बताया जा रहा है कि काम ज्यादा होने के कारण गैर बीपीएल मरीजों के ऑपरेशन के लिए बेहोशी के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाया जाता है। कभी कभार यदि समय हो तो डा. ओमप्रकाश गैर बीपीएल को भी सेवाएं देते हैं। लेकिन यदि वे उपलब्ध नहीं हैं तो मरीज को बेहोशी के निजी डॉक्टर की 2000 रुपये की फीस भरनी पड़ती है। ऐसे में यह मरीज की किस्मत पर ही निर्भर है कि डॉ. ओमप्रकाश उस मरीज के ऑपरेशन के समय खाली है या नहीं। गर्भवती महिलाओं के प्रसव व बीपीएल मरीजों को डा. ओमप्रकाश खुद सेवाएं देते हैं।
डा. ओमप्रकाश ने बताया कि चूंकि वे अस्पताल इंचार्ज भी हैं। इसलिए कई बार समय नहीं होता तो तीन-चार डॉक्टर हैं, जो पैनल में हैं। उन्हें बारी-बारी से ऑपरेशन में आवश्यकता अनुसार बुलाया जाता है। निजी डॉक्टर की सेवाओं के लिए गैर बीपीएल मरीज से 2000 रुपये की फीस ली जाती है।
सतीश के साथ ऑपरेशन करवाने वाले मरीज की भी कर दी गई छुट्टी : शुक्रवार को ऑपरेशन के लिए मंगवाए गए सामान का बिल मांगने व डॉक्टर को लेकर सतीश कुमार द्वारा शिकायत करने के बाद हुए विवाद के बाद उसके आस-पास दाखिल सभी मरीजों की छुट्टी कर दी गई। जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि एकदम से सभी को छुट्टी क्यों दी गई? इनमें से कई मरीजों से सतीश की बात का समर्थन करते हुए कहा था कि उनसे भी बाहर से सामान मंगवाकर रुपये लिए गए हैं। एक मरीज कैथल निवासी अंकुश का ऑपरेशन सतीश के साथ ही हुआ था, शनिवार को उसे भी छुट्टी दे दी गई। जबकि उसकी टांग का ऑपरेशन हुआ है। उसने कहा कि वह बीपीएल परिवार से है। उसे 16 दिन में 4 बार ऑपरेशन का समय दिया गया। बड़ी मुश्किल से उसकी टांग में आए फ्रैक्चर का ऑपरेशन किया गया है। उसे अभी छुट्टी देकर बुधवार को बुलाया है।
अस्पताल में दिन भर चर्चा का विषय रहा मामला : अस्पताल में यह पूरा मामला दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। कई अधिकारी व कर्मचारियों की निगाह अब शिकायत पर होने वाली जांच पर है कि आगे क्या होगा। कर्मचारी दिन भर इस संबंध में एक दूसरे से जानकारी हासिल करते नजर आए।
ऑपरेशन के लिए मंगवाई जाने वाली किट पर भी सवाल : अस्पताल में हड्डी के ऑपरेशन के लिए भी जो किट मंगवाई जा रही है। उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस किट की बाजार में कीमत 4 से 5 हजार रुपये मुश्किल से है। लेकिन इसे जिला अस्पताल में करीब 10 हजार से अधिक में दिया जा रहा है। इस पूरे मामले की जांच के बाद ही पर्दा उठ सकेगा कि यह नियमानुसार है या फिर मरीजों से महंगी किट क्यों मंगवाई जा रही है।
मरीज की फाइल में बिल लगाने के प्रावधान को लेकर संशय : अस्पताल सूत्रों से पता चला कि मरीज की फाइल में उस सामान का बिल लगाया जाना अनिवार्य है, जिसे बाजार से मंगवाया जाता है। लेकिन जिला अस्पताल में फाइल में ऐसा कोई बिल नहीं लगाया जा रहा। इंचार्ज डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि बीपीएल व गर्भवती महिलाओं के लिए जो सामान विभाग मंगवाता है, उसका रिकॉर्ड रखा जाता है। लेकिन गैर बीपीएल मरीज सामान खुद लाते हैं तो उसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। फाइल में बिल लगाने का नियम नहीं है।
सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन ने कहा कि एसडीएम के निर्देश पर कमरे को सील कर दिया गया है। बाकी डीसी कार्यालय में दी गई शिकायत की प्रति उन्हें नहीं मिली है। शिकायत की जांच की जाएगी। जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। मरीज की फाइल में सामान का बिल लगाए जाने का प्रावधान है या नहीं, इस बारे में सोमवार को अधिकृत जानकारी पता करके बता दिया जाएगा।
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