अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। लंबे समय बाद पक्षी प्रेमियों को वृद्धकेदार सरोवर में दुर्लभ श्रेणी के पक्षी देखने को मिले हैं। पिछले करीब तीन-चार दिनों से काफी संख्या में दुर्लभ श्रेणी के पक्षी सरोवर में आए हुए हैं। जो यूरोप व साइबेरिया देशों से आते हैं और कुछ माह का प्रवास करने के बाद वापस लौट जाते हैं। इन पक्षियों को देखकर पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं। दूसरी ओर कुछ गांवों के तालाबों में अभी भी धागे लगाए गए हैं, जिन्हें मछली पालन करने वाले ठेकेदार हटा नहीं रहे हैं। इससे पक्षियों को नुकसान हो रहा है।
पक्षी प्रेमी डॉ. चेतना शर्मा ने बताया कि वृद्धकेदार सरोवर में पिछले तीन-चार दिनों से विदेशी पक्षी नजर आ रहे हैं। पहले ये पक्षी तीन-चार की संख्या में दिखते थे। लेकिन इस बार खुशी की बात यह है कि ये 100 से 150 की संख्या में है। यह कोमन पोचार्ड दुर्लभ श्रेणी का पक्षी है। इसका भूरा सिर, काली छाती व आंखें लाल हैं। जो लुप्त होते पक्षियों में शामिल है। यह रात को पानी में वनस्पति व छोटी मछलियां खाती है। इनकी संख्या आजकल कम होती जा रही है। ये यूरोप व साइबेरिया से आती हैं। इसके अलावा इंडियन स्पॉट बिल, रिवर टर्न, दुर्लभ श्रेणी की टफटिड डक, कश्मीर फ्लाई कैचर सहित कई अन्य पक्षी भी शामिल हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से खत्म हो रहे हैं ठिकाने : इन पक्षियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से ठिकाने खत्म होते जा रहे हैं। क्योंकि गांवों में अधिकतर तालाबों को ठेके पर दिया जाता है। जहां ठेकेदार धागे लगाकर इन पक्षियों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। अभी भी जिले के कई गांवों में लोगों ने तालाबों में धागे लगाए हुए हैं। जहां ठहरना इन पक्षियों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है।
धागों के ना हटने से परेशानी : पक्षी प्रेमियों का कहना है कि डयोडखेड़ी, डोहर व नौच सहित कई गांवों में तालाबों में धागे लगाए हुए हैं। जिस कारण पक्षी खतरे में हैं। प्रशासन को इस संबंध में संज्ञान लेना चाहिए।
वृद्धकेदार सरोवर में पहुंचे प्रवासी पक्षी, कई सालों बाद दिखे कोमन पोचार्ड दुर्लभ श्रेणी के पक्षी
पक्षी प्रेमी उत्साहित
लेकिन गांवों में तालाबों में लगाए जा रहे धागों को ना हटाए जाने से निराश
सरकार से मांग
तालाबों में लगाए गए धागों को हटाया जाए
फोटो संख्या-12 व 13