अमर उजाला ब्यूरो
गुहला चीका।
गुहला के एसडीएम सुरेंद्र पाल ने सोमवार को चीका अनाज मंडी, अतिरिक्त अनाज मंडी व रामथली समाधां मंडियों का दौरा किया। अपने दौरे के दौरान उन्होंने पहले अनाज मंडी चीका में पड़े व तोले जा रहे माल का माप तोल चेक किया। एसडीएम ने मंडी में मौजूद किसानों से भी बात की तथा उनकी समस्याएं जानी।
अनाज मंडी में अपने दौरे के दौरान एसडीएम ने एक किसान के साथ सरेआम हो रही ठगी को पकड़ लिया। हुआ यूं कि अनाज मंडी का चक्कर काटते काटते एसडीएम अपनी धान तुलवा रहे एक किसान के पास खड़े हो गए तथा पूछ लिया कि धान का क्या रेट मिला है। किसान ने बताया कि 1590 रुपये प्रति क्विंटल। जब उन्होंने आढ़ती से पूछा कि किसान का धान क्या भाव बिका है तो आढ़ती ने बताया कि 1680 रुपये प्रति क्विंटल बिका है। इसके बाद एसडीएम ने आढ़ती से एच वन रजिस्टर मांगा तो उसमें भी 1680 रुपये प्रति क्विंटल भाव दर्ज किया हुआ था। एसडीएम सुरेंद्रपाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने मार्केट कमेटी को आढ़ती के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम ने कहा कि मंडी में खरीद के दौरान हुए एक बड़े घोटाले के संकेत मिल रहे है। उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा रजिस्टरों में धान की ढेरियां दर्ज नहीं की जा रही है और बिना दर्ज किए बोरियों में माल भरा जा रहा है। एसडीएम ने बताया कि आढ़ती व सरकारी खरीद एजेेंसियां मिलकर किसानों को चूना लगा रहे है। एसडीएम ने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियां सरकार द्वारा तय भाव पर किसानों का धान नहीं खरीद रही है। उन्होंने कहा कि अगर लिखित शिकायत आए तो वे इस मामले की जांच करवाएंगे। एसडीएम ने बताया कि कई जगहों पर आढ़तियों द्वारा खरीद एजेंसी के रजिस्टर में धान की ढेरी दर्ज करवाए बिना तोल कर बोरियों में भरी जा रही थी। एसडीएम ने यह भी बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की ड्यूटी बनती है कि वह अनाज मंडी की हर दुकान पर पहुंचकर धान की ढेरियां चेक करे और उसके बाद ही किसान का धान खरीदा जाए, परंतु सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। सिर्फ एक ही दुकान पर बैठकर पूरी अनाज मंडी का धान लिख लिया जाता है। उन्होंने बताया के इस सारे मामले को लेकर उपायुक्त कैथल व खरीद एजेंसियों के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर मामला उनके संज्ञान में लाया जाएगा। इस अवसर पर उनके साथ मार्केट कमेटी चीका के चेयरमैन जगीर सिंह कंबोज, मंडी सुपरवाइजर रामफल सिंह नेहरा, उमा शंकर, ईश्वर चंद व सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे।