फॉगिंग मशीनों के अभाव में कैसे रोकेंगे डेंगू और मलेरिया
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मानसून दस्तक दे चुका है। इसके साथ ही बारिश भी शुरू हो गई है। घरों में सप्लाई होने वाले पानी में बारिश के कारण मच्छर भी पनपने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों में गंदगी का आलम होने के कारण मलेरिया और डेंगू फैलने की आशंका बढ़ गई है। मलेरिया और डेंगू के से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग हो या नगर परिषद दोनों के पास ही फॉगिंग मशीनों का भारी टोटा है।
नगर परिषद के पास महज तीन मशीनें
बारिश में होने वाले मच्छरों के आतंक से निपटने के लिए नगर परिषद ने तो अपनी कमर कस ली है। कहने को 250 कर्मचारी बताए जा रहे हैं। लेकिन इनका मुख्य काम सफाई करने का है। मशीनें कम होने के कारण फॉगिंग का कार्य भी मुश्किल हो रहा है।
यह है फॉगिंग मशीनों की स्थिति
जिला में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 16 मशीनों की आवश्यकता है। लेकिन कुल सात मशीनें पूरे जिले में तैनात है। जिसमें नगर परिषद के पास तीन, मलेरिया विभाग के पास दो, टीक व पूंडरी में एक एक मशीनें हैं। जबकि गुहला, कलायत, राजौंद व सीवन में एक भी फॉगिंग मशीन नहीं है। ऐसे में यहां पर फॉगिंग के लिए इन क्षेत्रों के लोगों को वंचित रहना पड़ेगा।
सर्वे के लिए बनाई तीन टीमें
मलेरिया विभाग ने मच्छरों से बचाव के लिए तीन टीमें बनाई है। जो मलेरिया व डेंगू के लार्वे की जांच करेगी। इस टीम में कुल छह सदस्य है। जो हल्का के अनुसार दौरा कर लार्वे की स्थिति को जानेंगे।
फॉगिंग के लिए जारी किए निर्देश
मलेरिया विभाग के इंचार्ज डॉ. देवेंद्र ने बताया कि विभाग ने मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर फॉगिंग का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों में बीडीपीओ व शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद को कहा गया है। फॉगिंग का कार्य अब उनके अनुसार करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि फॉगिंग करवाने के लिए उन्होंने सभी पंचायतों व नगरपालिकाओं को नोटिस भेज दिया है। डॉ. ने बताया कि फॉगिंग का कार्य 15 जुलाई से शुरू हो गया है जो नवंबर माह तक चलेगा।
मशीनों की कमी से परेशानी
मलेरिया एवं डेंगू बचाव कार्यक्रम के संयोजक डॉ. देंवेद्र ने बताया कि जिले में 16 की बजाए केवल सात ही फॉगिग मशीनें हैं, जिस कारण जिले में समयानुसार फॉगिंग नहीं हो पाती है। मलेरिाया विभाग में केवल दो ही मशीनें हैं। जिन्हें किसी भी पंचायत द्वारा स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिखे जाने पर भेजा जाता है।