कैथल। साहित्य सभा कैथल की मासिक काव्य-गोष्ठी का आयोजन सभा के प्रधान प्रो. अमृत लाल मदान की अध्यक्षता में आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक-कक्ष में किया गया। गोष्ठी का संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी के दौरान रिसाल जांगड़ा के बाल कविता-संग्रह घुंघरू बचपन के का लोकार्पण प्रो. अमृत लाल मदान, कमलेश शर्मा और विनोद कौशिक ने किया।
बच्चों के मन की बात रिसाल जांगड़ा ने इन शब्दों में रखी-हम तो झूले हैं सावन के, हम बच्चे हैं फूल चमन के। ईश्वर गर्ग का कहना था कि पांव में छाले, नजर में बेबसी। राहबर से हमने पाया है यही। बड़ों की सीख को सतबीर जागलान ने इन शब्दों में कहा कि सां के ऊप्पर आंच न आवै, म्हारे कहगे बुड्डे स्याणे, चोर के घर कदे धन न आवे, उन्ने पड़ें सै धक्के खाणे। बेटी के विवाह को लेकर डॉ. तेजिंद्र ने कहा जहां कहीं भी बेटी के हाथ पीले होते हैं। वहीं कहीं मात-पिता के नैन गीले होते हैं। मकान बनाने की बजाय घर बनाने की सलाह डॉ. कमलेश संधू ने कहा कि अच्छा, तो जमीन देख आये। तो मकान बनेगा। मेरी सुनो। मकान नहीं, घर बनाना। बचपन को याद करते हुए सतपाल शास्त्री ने कहा कि बचपन की वें बात पुराणी याद आवैं। सुणता सारी रात कहाणी, याद आवैं। इनके अलावा युवराज, दीपांशी, रवींद्र रवि, श्याम सुन्दर गौड़, हकीम चतरभुज बंसल सौथा, सरोज जोशी, मधु गोयल, राजकुमारी मदान, सोहनलाल सोनी शर्मा, मेहरू शर्मा प्यासा, स्वामी टीसी अग्रवाल, विनोद कौशिक, शमशेर सिंह कैंदल, राजकुमार, पंडित महेंद्र पाल सारस्वत, नीलम देवी, प्रो. अमृत लाल मदान, कमलेश शर्मा, चंद्रकांता व आरपी गुलाटी ने भी काव्य-पाठ किया।