स्कूल की दीवार पर राजनीति शुरू
विधायक बाजीगर के विरोधी नोदी चीका ने लगाई सीएम विंडो पर शिकायत
दो दिन में अपनी ईंटें उठवा लो नहीं तो किसी धार्मिक संस्था को कर देंगे दान
एसरीएम ने किया स्कूल का दौरा, बीईओ से मांगी रिपोर्ट
फोटो संख्या-38
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दीवार ढहाने को लेकर उठे विवाद पर अब सियासत शुरू हो गई है। विधायक कुलवंत बाजीगर के प्रबल विरोधी नोदी चीका ने सीएम विंडो पर एक शिकायत लगाई तथा एसडीएम संयम गर्ग से मिलकर दीवार मामले में जांच की मांग की। नोदी ने कहा कि अगर दो दिन में भू माफिया ने स्कूल की जमीन पर कब्जा करने के लिए गिरवाई गई ईंटें व अन्य निर्माण सामग्री स्कूल से ना हटवाई तो वे अपने साथियों के साथ जाकर सारा सामान उठाकर किसी धार्मिक संस्था में दान कर आएंगे। इस बीच एसडीएम गुहला संयम गर्ग ने स्कूल का दौरा किया तथा मौके का मुआयना किया। एसडीएम ने खंड शिक्षा अधिकारी प्रेम सिंह पूनिया को पूरे मामले की पड़ताल करके रिपोर्ट देने को कहा है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले किसी ने शहीद ऊधम सिंह चौक पर स्थित लड़कों के
सरकारी स्कूल में ईंटें गिरवा दी थी तथा नींव खुदवानी शुरू की थी। कहा यही गया था कि चूंकि स्कूल की दीवार पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनी है इसलिएअंदर दीवार बनाकर बाद में बाहर वाली दीवार ढहा दी जाएगी। नगर पार्षद वेद राज बाल्मीकि द्वारा यह मामला उठाए जाने के बाद ऐसी हड़बड़ी मची कि अब कोई भी गिरवाई गई ईंटों या खुदवाई गई नींव की जिम्मेवारी लेने को भी तैयार नहीं है।
तकरीबन दो दशक पहले जब प्रशासन ने चीका के चारों मार्गों पर रखे लकड़ी के
खोखे उठवाए थे तो तब भी इसी स्कूल की दीवारों को थोड़ा अंदर खिसकाकर
दुकानें काटे जाने की चर्चाएं चली थी। स्थानीय नेता इस प्रयास में जुटे थे कि किसी तरह सरकार से यह प्रस्ताव पास करवाकर स्कूल की चार दीवारी पर मार्केट काट दी जाए। तर्क यह दिया गया था कि इससे सरकार की आमदन बढ़ेगी और खोखे उठने से बेरोजगार हुए लोगों को रोजगार मिल जाएगा लेकिन उस समय भी चीका गांव से सैकड़ों लोग ढोल बजाते हुए मेन चौक पर पहुंचे थे। जब तक प्रशासन ने लिखित में यह भरोसा नहीं दिलाया कि स्कूल में किसी तरह की व्यवसायिक गतिविधि नहीं कायम की जाएगी जब तक लोग चौक से नहीं हटे थे।
परदादा ने बनवाया था, हम रक्षा करेंगे:-गुहला के युवा जाट नेता जगदेव सिंह सीड़ा ने कहा कि चीका व आसपास इलाके के बच्चों के पढ़ने के लिए उनके परदादा लछमन सिंह ने 1956 में सरकार को यह पंचायती जमीन मुहैया करवाई थी। वे उस समय चीका के सरपंच थे। जगदेव ने कहा कि इस स्कूल की रक्षा के लिए चीका का बच्चा बच्चा संघर्ष करेगा।