कहने को लागू कर दी गई भावांतर भरपाई योजना..जे फार्म नहीं मिल रहे किसानों को
मंडी में आढ़ती नहीं दे रहे जे फार्म, आढ़तियों का जवाब-अभी जे फार्म के लिए जारी नहीं हुआ नोटिफिकेशन
मार्केट कमेटी अधिकारी ने कहा-जे फार्म आढ़ती के पास, फसल बिकते ही देना जरूरी
सब्जी मंडियों में 2 से 3 रुपये प्रति किलो पिट रहा है टमाटर, 4 रुपये है टमाटर का न्यूनतम समर्थन मूल्य
सरकार की भावांतर भरपाई योजना को लागू करने के तरीके पर उठे बड़े सवाल
फोटो संख्या-9 से 11
नसीब सैनी
कैथल। सरकार द्वारा जोर-शोर से लागू की गई भावांतर भरपाई योजना में अभी हवा-हवाई बातें हो रही हैं। जिस जे फार्म के आधार पर किसानों को इस योजना का लाभ मिलना है, उस पर स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है। फसल बेच रहे किसानों को जे फार्म नहीं मिल रहा। आढ़तियों का कहना है कि मार्केटिंग बोर्ड से नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है जे फार्म आढ़तियों के पास है और फसल बिकते ही देना जरूरी है। अब इस झोल में किसानों का भावांतर भरपाई की बजाए खुद का बवंडर बन गया है। किसानों को समझ नहीं आ रहा, योजना के तहत उन्हें कोई लाभ मिल पाएगा भी या नहीं।
क्या है भावांतर योजना:-भावांतर योजना में सरकार ने इस बार टमाटर के लिए 4 रुपये प्रति किलो न्यूनतम रेट देने का ऐलान किया है। योजना के तहत रजिस्टर्ड किसानों को यदि 4 रुपये से कम की कीमत मिलती है तो उसकी भरपाई सरकार द्वारा की जानी है। लेकिन इसके लिए किसानों को जे फार्म देना होगा।
सब्जी मंडी में नहीं मिल रहा जे फार्म:-
सब्जी मंडी में किसानों जे फार्म नहीं दिया जा रहा। अमर उजाला ने वीरवार सुबह सब्जी मंडी में जाकर इस बारे में पड़ताल की तो मौके पर पहुंचे किसान चक्क पाड़ला के संदीप से जानकारी मिली कि उसका टमाटर 75 रुपये प्रति क्रेट(एक क्रेट में करीब 25 किलो) के हिसाब से बिका है। इस तरह से उसे टमाटर का 3 रुपये रेट मिला है। उसने आढ़ती से जे फार्म मांगा तो आढ़ती ने कहा कि कल ले जाना। इसी प्रकार यहां पहुंचे कोयल से किसान विनोद ने कहा कि उसका टमाटर 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक बिका है। उसने आढ़ती से जे फार्म मांगा है। आढ़ती ने जे फार्म तो नहीं दिया, लेकिन इंकार भी नहीं किया। कल लेकर जाने को कहा है।
माल खरीदे या बेचें, उसी दिन देना होता है जे फार्म:-
मार्केट कमेटी सचिव मनजीत ने कहा कि जे फार्म आढ़ती के पास होता है। जब माल की खरीद-बेच हो। तभी जे फार्म देना होता है। जिस आढ़ती के पास जे फार्म नहीं है, वह मार्केट कमेटी से लेकर जा सकता है। यदि किसी आढ़ती की जे फार्म ना देने की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद अमर उजाला द्वारा गांव बालू में टमाटर उत्पादक किसान राजकुमार के खेत में जाकर स्थिति का जायजा लिया तो किसानों को 4 रुपये प्रति किलो की कीमत मिलने के बावजूद खर्च पूरा नहीं हो रहा। राजकुमार ने बताया कि कैथल, कलायत या राजौंद मंडी में ले जाने पर ही उसे 2 रुपये प्रति किलो तक मजदूरी व किराये पर खर्च करना पड़ता है। ट्रे का किराया भी प्रति टे्र 10 रुपये हर रोज देना पड़ता है। इस तरह से यदि 4 रुपये प्रति किलो भी बिके तो उसे महज 1 रुपये मुश्किल से बचेगा। एक दिन में उसका पूरा परिवार 5 क्विंटल के लगभग टमाटर तोड़ पाता है। उसे इसके बदले मुश्किल से 1 हजार से 1200 रुपये तक मिल पाते हैं। तीन दिनों से उसका टमाटर 2 रुपये से लेकर 3 रुपये तक ही बिका है। जब उसने कैथल मंडी में जे फार्म मांगा तो उसे कहा गया कि बाद में लेकर जाना। उसने भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन भी करवाया हुआ है, यदि जे फार्म नहीं मिला तो 4 रुपये से कम कीमत की भरपाई भी नहीं हो पाएगी। ऐसे में कैसे किसान की आय दोगुनी होगी।
जिला बागवानी अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के बाद 15 मार्च तक वेरिफिकेशन हो रही है। जब यह वेरिफिकेशन हो जाएगी, इसके बाद काम मार्केटिंग बोर्ड का काम है। किसानों को वहां से जे फार्म लेना होगा। इसके बाद ही उसके भाव की भरपाई होगी। आढ़ती जे फार्म देने से इंकार नहीं कर सकते।
हमें कोई आदेश नहीं:-
सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मुकुंद कालड़ा ने कहा कि जे फार्म अभी आधिकारिक रुप से लागू नहीं हुआ है। मार्केटिंग बोर्ड द्वारा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। बैठक में इस बारे में जानकारी जरुर दी गई थी, अभी तक कोई नोटिफिकेशन नहीं हुआ है।