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दुष्कर्म पीड़ित लड़की के गर्भपात के लिए चिकित्सकों की राय लेकर गर्भपात करवाएं पुलिस अधिकारी

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स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाईकोर्ट के आदेशानुसार सेमिनार का आयोजन
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। यदि दुष्कर्म पीड़ित कोई लड़की गर्भवती है तो पुलिस कर्मचारी उसे पहले लेकर कोर्ट में न जाएं। इसके लिए माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशानुसार जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अधिकृत कर दिया गया है कि वे नियमानुसार फैसला लें कि गर्भवती लड़की का गर्भपात जरूरी है या नहीं। ताकि पीड़िता को जल्द राहत मिल सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह जानकारी लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित एक सेमिनार में दी गई। इस सेमिनार में सभी थानों के प्रभारी, कानूनी अधिकारियों के अलावा समाज सेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
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डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ ने बताया कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 2016 में मेवात में नाबालिग लड़की के रेप के मामले में पीड़ित पाए जाने पर दिए गए एक फैसले के संदर्भ में सभी जिलों में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) विषय पर सेमिनार के आदेश दिए हैं। सेमिनारों में सभी डाक्टरों, वकीलों व जांच करने वाली एजेंसियों के अधिकारियों व पुलिस के अधिकारियों को जागरूक किया जाना है। इसी संदर्भ में यह सेमिनार आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि चिकित्सक रेप से पीड़ित लड़की के जीवन को बचाने के लिए गर्भपात के लिए समय गवाएं बिना गर्भपात करवाएं। इस संदर्भ में एक या दो डाक्टरों की राय ली जा सकती है। यदि दोनों डाक्टरों की राय इस मामले में अलग-अलग है तभी कोर्ट से राय ली जा सकती है। यदि किसी लड़की की आयु 18 वर्ष से कम है तो गर्भपात के लिए अभिभावकों की सहमती लेना जरूरी होगा। यदि लड़की वयस्क है तो वह खुद भी सहमती दे सकती है। यदि किसी मामले में वैवाहिक पति-पत्नी के गर्भ निरोधक उपाय फेल होता है तो ऐसे मामलों में भी गर्भपात के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए जिला स्तर पर सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जो ऐसे मामलों पर नियम के बारे में समय-समय पर लोगों को जागरूक करेंगे। गर्भपात के लिए रजिस्टर डाक्टर ही अधिकृत किए गए हैं तथा उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण होना जरूरी है। गर्भपात करने के लिए सरकारी अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र में सभी आवश्यक सुविधाएं तथा वातावरण स्वच्छ हो। इसके अलावा एमटीपी केंद्रों के लिए सिविल सर्जन की अध्यक्षता में गठित कमेटी में एक महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक एनजीओ के सदस्य तथा पंचायती राज से एक सदस्य लिया गया है। इस कमेटी का कार्यकाल दो वर्ष के लिए है। उन्होंने बताया कि अवांछित गर्भ तथा रेप से पीड़ित होने पर गर्भ को अब 12 सप्ताह तक एक डाक्टर की राय और 12 से 20 सप्ताह तक का है तो दो डॉक्टरों राय के अनुसार एमटीपी करवाया जा सकता है। इस मामले में लोगों को आवश्यक रूप से जागरूक होना पड़ेगा। सिविल सर्जन डा. अशोक कुमार ने भी विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इस मौके पर डा. रेनू चावला, डीए इंद्रदीप, बीईई राजेश कुमार, डीपीएम नरेंद्र कुमार, स्वास्थ्य विभाग के व निजी अस्पतालों से चिकित्सक, पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
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