फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी खर्च भी वसूला जाएगा डेरा सच्चा सौदा से

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी खर्च भी वसूला जाएगा डेरा सच्चा सौदा से
विज्ञापन


नसीब सैनी
कैथल।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हिंसा सहित नुकसान की भरपाई के लिए डेरे की प्रॉपर्टी से वसूली के आदेशों के बीच अब हरियाणा सरकार का इस उपद्रव में सुरक्षा उपायों पर खर्च भी डेरे से वसूला जा सकता है। सभी जिलों में पत्र जारी कर सरकार ने उपद्रव से निपटने के लिए सुरक्षा उपायों पर खर्च हुई राशि का विवरण मांगा है। ताकि कोर्ट के आदेशानुसार इसका आंकलन किया जा सके।
गत 25 अगस्त को पंचकूला कोर्ट द्वारा डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा के चलते पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था कि जो भी नुकसान प्रॉपर्टी को होगा, उसे डेरे की संपत्ति से वसूला जाएगा। इसके तहत डेरे की संपत्ति को बेचने व हस्तांतरित करने पर कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। रविवार शाम तक कोर्ट के आदेशानुसार प्रॉपर्टी के नुकसान का आंकलन किया जा चुका है।
विज्ञापन

इसी बीच नए आदेशों में सरकारी खर्च का ब्योरा मांगा गया है। कैथल में सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दोषी करार दिए जाने के मामले में दायर याचिका में कोर्ट को जानकारी दी जानी है। सुरक्षा व अन्य उपायों पर सरकारी खर्च की पूर्ण जानकारी अगले दस दिनों में दी जाए।
दूसरी ओर यदि यह वसूली भी डेरे से की जाती है तो पूरे प्रदेश में यह राशि सैकड़ों करोड़ में हुई है। ऐसे में डेरे को हिंसा की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

एक दिन का एक सेना या अर्धसैनिक बल का खर्च लाखों रुपये में
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि अर्धसैनिक बलों, सेना या अन्य कंपनियों की तैनाती का खर्च भी प्रदेश सरकार के खर्च में ही शामिल होता है। एक कंपनी का एक दिन का खर्च कम से कम 2 लाख रुपये बनता है। इस तरह से पूरे प्रदेश में इस समय दर्जनों कंपनियां तैनात हैं। इसके अलावा रिजर्व पुलिस फोर्स की तैनाती पर भी खर्च आ रहा है। सभी जिलों में फ्लैग मार्च, नाके लगाकर कर्मचारियों की ड्यूटियां सहित सुरक्षा कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए 24 घंटे ड्यूटी के दौरान यातायात भत्ता, खाने-पीने के खर्च से लेकर कई तरह के ऐसे खर्च हैं। यदि इन सभी तरह के सरकारी खर्चों का आंकलन किया गया तो पूरे प्रदेश में यह राशि न जाने कितने करोड़ तक पहुंच जाएगी।

रोडवेज के नुकसान का भी हो रहा है आंकलन
रोडवेज की बसों की आमदनी सहित यदि इस खर्च व नुकसान में सरकार आय अर्जित करने वाले विभागों का नुकसान भी इसमें जोड़ा जा सकता है। प्रदेश में 3 हजार से अधिक सरकारी बसों का बेड़ा है। जिनकी आय प्रतिदिन करोड़ों रुपये में है। इसी तरह कई विभाग हैं, जहां से सरकार को आय होती थी। पिछले कई दिनों से व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है।
विज्ञापन

डीसी सुनीता वर्मा ने बताया कि अगले 10 दिनों में सरकारी विभागों के खर्च का ब्योरा मांगा गया है। इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों को सूचित किया गया है। ताकि समय अनुसार खर्च के विवरण की रिपोर्ट भेजी जा सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें