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छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आय बढ़ा सकते हैं किसान-शर्मा

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बासमती उत्पादक किसानों को दिए टिप्स
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- दवाओं के वैज्ञानिक सलाह से प्रयोग करने के लिए हुआ सेमिनार आयोजित
छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आय बढ़ा सकते हैं किसान : शर्मा

अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन द्वारा बुधवार को अमृत पैलेस में किसानों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को बासमती चावल के उत्पादन में बरती जाने वाली छोटी-छोटी सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। ताकि वे अपना खर्च कम कर सकें। इसके अलावा उन्हें सावधानी के साथ वैज्ञानिकों की सलाह से दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी गई।
बासमती विकास अनुसंधान संस्थान से आए प्रिंसिपल वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने कहा कि किसान को व्यापारी बनकर खेती करनी चाहिए। किसान खाद व दवाओं के माध्यम से बेवजह अपना खर्च बढ़ाते रहते हैं। उन्हें चाहिए कि वे प्लानिंग करके खेती करें। धान में सबसे पहले अच्छे बीज का चयन करें। उसका उपचार करके पनीरी तैयार करते समय सावधानी बरतें। पनीरी के लिए 1 किलो बीज के लिए 25 वर्ग मीटर क्षेत्र काफी रहता है। इसके बाद खड़े पानी से पनीरी उखाड़कर पनीरी का भी एक दवा के साथ उपचार करें। रोपाई के समय सावधानी बरतें तो पौधे में उचित दूरी होनी चाहिए। इसके बाद समय-समय पर अपनी फसल का ध्यान रखें। कटाई के समय हाथ से कटने वाली फसल को ही अच्छी कीमत मिलती है। इसलिए हाथ से कटाई करते समय सावधानी बरतें। पौधे को कुछ ऊंचाई से काटें। ताकि बालियां रखते समय मिट्टी में न लगें और गुणवत्ता पर असर न आए। मंडी में व्यापारी धान खरीदते समय उसके रंग, उसमें कितना साबुत चावल निकलेगा और वह सूखा है या नहीं, ये तीन चीजें देखता है। किसान इन तीनों चीजों का ध्यान रखकर अपनी फसल को मंडी में लेकर जाएंगे तो उन्हें निश्चित तौर पर अच्छी कीमत मिलेगी। गर्दन तोड़ या पत्ता तोड़ बीमारी में कुछ लक्षण दिख जाते हैं। इसलिए समय रहते किसान अपनी फसल पर इसका प्रभाव देखें और वैज्ञानिक सलाह लेकर ही खाद व दवा का प्रयोग करें। धान के खेत में ढेंचे या मूंग की हरी खाद रोपाई से एक या दो दिन पहले ही खेत में ट्रैक्टर से बुआई करके डाल दें। उसके बाद किसी भी तरह की खाद डालने की जरूरत नहीं रहेगी। किसानों का खर्च बचेगा। इस तरह से कई छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर किसान आमदनी बढ़ा सकते हैं।
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आईसीएआर से आए वैज्ञानिक डा. एके सिंह ने कहा कि बीमारी आने से पहले ही किसान अपनी फसल में आवश्यक उपाय करें। ताकि उन्हें दवा डालनी ही न पड़े। संस्थान भविष्य के लिए ऐसी किस्में तैयार कर रहा है, जिसमें दवाएं डालने की जरूरत ही नहीं रहेगी। दो किस्में आ भी चुकी हैं। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सेतिया ने कहा कि वैज्ञानिक सलाह से दवाओं का प्रयोग किसानों व व्यापारियों सहित पर्यावरण की दृष्टि से भी उपयुक्त है। इस अवसर पर सुरेश चौधरी, नरेंद्र मिगलानी, कैलाश भगत, अनिल खुराना, राजीव चौधरी, नरेश गोयल, टिल्डा से जयप्रकाश आदि मौजूद थे।
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