जनता दरबार बीच में छोड़कर चले गए मुख्यमंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा जनता की समस्याएं सुनने के लिए आयोजित खुले दरबार में अव्यवस्था का बोलबाला रहा। इस अव्यवस्था के बीच लोग उस समय हक्के-बक्के रह गए। जब मुख्यमंत्री खुले दरबार के बीच जनता के बीच जा पहुंचे और भीड़ में लोगों के हाथों से शिकायतें पकड़ने लगे। किसी की शिकायत सीएम के हाथ लगी, किसी की नहीं। मुख्यमंत्री एक तरह से कागज एकत्रित कर हाल से निकल लिए।
शुभम पैलेस में आयोजित खुले दरबार में शिकायत लेकर पहुंचे लोगों की शिकायत पहले दर्ज की गईं। करीब 240 से ज्यादा लोगों ने शिकायतें दर्ज करवाईं और अपनी बारी के इंतजार में दरबार में बैठ गए। मुख्यमंत्री अपने तय समय से करीब दो घंटे देरी से पहुंचे। हालांकि सीएम ने शिकायतें सुनने की शुरुआत काफी अच्छे ढंग से की। उन्होंने एक-एक करके करीब 72 लोगों की व्यक्तिगत तौर पर शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश भी दिए। लेकिन इसके बाद सीएम अचानक उठ खड़े हुए। मंच से नीचे उतरकर भीड़ के बीच जा पहुंचे। जहां सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। वहीं लोग सीएम को शिकायत देने के लिए एक साथ टूट पड़े। इस तरह से पूरा माहौल अव्यवस्थित हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री के सामने जो भी आया। उसने किसी तरह अपनी शिकायत सीएम को थमा दी। सीएम ने हॉल में आने व जाने का चक्कर पूरा किया और शिकायतों को कर्मचारी ने अपनी बाहों में एकत्रित किया और गाड़ी की डिग्गी में रख दिया। सीएम तुरंत अपने काफिले के साथ चलते बनें। लोग अपनी शिकायतें लिए देखते रह गए।
गुहला से आई शीला देवी, शहीद भगत सिंह कालोनी से हरिकेश, कर्मबीर, पुरानी मंडी से विकास, लैंडरकीमा से जोहली देवी, बड़सीकरी से माया देवी ने कहा कि उनकी शिकायत ही नहीं सुनीं गईं।
सीएम को खुद करनी पड़ी शांति की अपील
इससे पूर्व भी खुले दरबार में अव्यवस्था का माहौल रहा। मुख्यमंत्री को खुद खड़े होकर शांति की अपील करनी पड़ी। उन्होंने अधिकारियों को भी कहा-लाइन लगवाकर रखनी चाहिए थी।
नेताओं को उठाकर अधिकारियों को पास बैठाया
मुख्यमंत्री ने दरबार में पहुंचते ही अपने पास बैठे भाजपा नेताओं को कुर्सी से उठाकर अगली कुर्सी पर बैठने को कहा। डीसी व एसपी को अपने अगल-बगल में बैठाकर लोगों की शिकायतें सुनीं। ताकि शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दे सकें।