राजौंद। कृषि विभाग व जिला प्रशासन द्वारा गेहूं के अवशेष न जलाने के आदेश कागजों में सिमटकर रह गए हैं। किसानों द्वारा गेहूं के अवशेषों के साथ छोटे व बड़े सैकड़ों पौधों को भी आग के हवाले किया जा रहा है। प्रकृति की अनमोल धरोहर व पर्यावरण के सजग प्रहरी वृक्ष आगजनी का शिकार होकर राख में तबदील होते कही भी देखे जा सकते हैं। किसानों को जैसे ही समय मिलता है उसी अनुसार गेहूं के अवशेषों के साथ वृक्षों को भी आग के हवाले कर देते हैं। प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा अभी तक इस कार्यवाही को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम न उठाने के कारण पेड़ों व अवशेषों को आग लगाने वाले किसानों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि गेहूं के अवशेषों के साथ हर वर्ष जितने पेड़ पौधे आग की बली चढ़ा दिए जाते हैं उनका चौथा हिस्सा भी किसानों द्वारा रोपित नहीं किया जाता। इस थोड़ी सी लापरवाही के चलते पर्यावरण प्रदूषण, अतिवृष्टि व सुखा पडना एक आम बात बन चुकी है। परंतु मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों व अवशेष जलाने वालों में से किसी को भी इन पर्यावरण के सजग प्रहरी पेड़ों की आग बुझाने की चिंता नहीं है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस तरह से वृक्षों को आग के हवाले करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।