पीआर धान की खरीद न होने से भड़के किसानों ने हैफेड कार्यालय को जड़ा ताला
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। पीआर धान की खरीद में एजेंसियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए हैफेड कार्यालय पर ताला जड़ दिया। हैफेड के मुख्य द्वार पर तालाबंदी करने के पश्चात किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे।
हैफेड के प्रबंधक सुरेश कुमार ने जब किसानों को समझाना चाहा तो किसानों ने कहा कि पहले उनकी समस्या सुनी जाए। किसान रघुबीर ढुंढवा, राजेश, गुरमीत, कुलदीप, तरसेम, अमरीक, राजकुमार, दीना व पवन आदि का कहना है कि वे पिछले करीब एक सप्ताह से धान लेकर मंडी में आए हुए हैं। मगर मंडी में कोई भी खरीदारी नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि धान का समर्थन भाव 1770 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। जिस धान में नमी ज्यादा व सफाई कम बताई जा रही है तो उसे यदि कम भाव पर किसान देने का तैयार हो जाएं तो इसकी तभी खरीद कर ली जाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ही नहीं बल्कि प्रशासन भी पूरी तरह से किसान विरोधी है जिसके चलते ही उनकी फसल समर्थन भाव पर नहीं बिक रही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का बदनाम करने में अधिकारियों का भी रोल है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा पीआर धान का समर्थन भाव निर्धारित करने पर भी उसे नहीं खरीदा जा रहा तो फिर किसानों को इस धान की रोपाई न किए जाने के फरमान जारी क्यों नही किए। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी धान की फसल की बिक्री नहीं होती तब तक वे मार्केट कमेटी में ही डेरा डाले रहेंगे। मंडी सुपरवाइजर ओमप्रकाश से जब पत्रकारों ने धान की बिक्री के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि सुबह से ही वे एजेंसी को धान खरीदने के लिए बुलाते रहे। करीब 2 बजे जब खरीद एजेंसी ने मंडी में दस्तक दी तो उन्हें अभी खरीद शुरू करने का आश्वासन ही मिला। देर शाम तक जब धान खरीद हुई तो किसान भड़क गए। हैफेड प्रबंधक सुरेश कुमार ने कहा कि कलायत अनाज मंडी में धान की फसल पर पंखा न लगाया जाना मुख्य समस्या का कारण बना हुआ है। कलायत मंडी के लिए राइस मिल अटैच नहीं किया गया यह भी एक समस्या है। धान की सफाई में कमी बता मिलर यहां से धान खरीदने के लिए नहीं आना चाहता। लेकिन इस सबके बावजूद मिलरों को बुलाया गया है। उसी धान का खरीदा जाएगा जो सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा कर रही होगी।