10 साल पहले जारी हुए थे अवैध कब्जे हटाने के आदेश, नोटिस पर नोटिस
लेकिन गांव भागल के जोहड़ की जमीन से नहीं हटाया जा सका है अवैध कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। गांव भागल में जोहड़ की जमीन पर किए गए कब्जे को हटवाने के लिए पिछले दस सालों से प्रयास जारी हैं। लेकिन आज तक सफलता नहीं मिल पाई है।
गांव भागल में स्थित गैर मुमकिन जोहड़ ब्राह्मणान की कुल 3 कनाल 6 मरले जमीन पर 15-20 सालों से कुछ लोगों ने अपने मकान बनाकर नाजायज कब्जा कर रखा है। दस साल पहले यानी फरवरी 2008 में गांव के कुछ लोगों ने इस कब्ज के खिलाफ एसडीएम गुहला की कोर्ट में इसके खिलाफ वाद दायर किया तो एसडीएम ने इसी साल के दिसंबर में कब्जाधारकों को नाजायज करार देते हुए जमीन से बेदखल करने का फैसला सुना दिया। इसके बाद यह मामला जहां जहां भी गया कब्जे को गलत करार दिया गया। वर्ष 2012 गांव वालों की तरफ से इस जमीन का कब्जा छुड़ाने की एक दरख्वास्त एसडीएम गुहला के यहां डाली गई तो एसडीएम ने तहसीलदार को कार्रवाई करने के आदेश दे दिए। तहसीलदार ने फील्ड कानूनगो के नाम आदेश लिख दिए। हर एसडीएम के तबादले पर नए आने वाले एसडीएम ने दखल के नए आदेश निकाले। तहसीलदारों ने कानूनगो के माध्यम से दखल डेट के नोटिस जारी किए। गांव वालों के अनुसार अब तक बीसियों बार फील्ड कानूनगो दखल की तारीख तय कर चुके हैं लेकिन हर बार लोग तो पहुंच जाते हैं पर किसी भी तारीख पर प्रशासन का कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं आता।
एसडीएम सुरेंद्र पाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे दफ्तर से बाहर हैं इसलिए मामले के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन का मामला चूंकि खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय के अंतर्गत आता है इसलिए बीडीपीओ गुहला से बात करें। उधर बीडीपीओ गुहला राज कुमार चानना ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं हैं। जब उनका ध्यान एसडीएम द्वारा पंचायत दफ्तर के नाम जारी किए गए दखल नोटिस की ओर दिलाया गया तो चानना ने कहा कि जब से उन्होंने गुहला में कार्यभार संभाला है, ऐसा कोई नोटिस नहीं आया है। पहले के किसी नोटिस की उन्होंने जानकारी होने से इनकार कर दिया।