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गुरुग्राम स्कूल हत्याकांड : अभिभावकों व स्कूल संचालकों में दहशत

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गुरुग्राम स्कूल हत्याकांड- अभिभावकों व स्कूल संचालकों में दहशत
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राजू जगत
कैथल। गुरुग्राम के स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड के बाद अभिभावकों व स्कूल संचालकों में दहशत का माहौल है। कई स्कूलों में सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर हैं तो कइयों ने सोमवार को स्कूलों में बैठक कर स्टाफ सदस्यों को आवश्यक एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए। वहीं बाल संरक्षण आयोग की सदस्या ने कहा कि सभी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की जाएगी। इंटरनेट पर ब्लू व्हेल नामक खेल को लेकर विभाग पहले ही एक एडवाइजरी जारी कर चुका है। अमर उजाला टीम ने सोमवार को शहर में कई स्कूलों में सुरक्षा उपायों की जानकारी हासिल की तो स्कूलों की सुरक्षा में कई छेद पाए गए।

स्कूलों में नहीं सुरक्षा के इंतजाम : शहर में करनाल रोड पर स्थित एक स्कूल में सुरक्षा के लिए कोई गार्ड तैनात नहीं मिला। इसी तरह से ढांड रोड पर स्थित एक स्कूल में गार्ड तो नहीं मिला, लेकिन यहां सीसीटीवी कैमरा अवश्य लगा हुआ मिला। इसके अलावा अंबाला रोड पर एक बड़े स्कूल के प्रवेश द्वार पर भी कोई सुरक्षा गार्ड नजर नहीं आया। इसी मार्ग पर स्थित एक अन्य स्कूल में गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ नजर आया। इसी तरह से एक बड़े सरकारी स्कूल में सुरक्षा संबंधी इंतजाम न के बराबर पाए गए। गेट पर कोई चौकीदार नजर नहीं आया। बिना किसी रोकटोक के कोई भी बाहरी व्यक्ति विद्यालय में प्रवेश कर सकता है।
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कई स्कूलों में दिखा प्रद्युम्न हत्याकांड का असर : गुरुग्राम के स्कूल में बच्चे की हत्या के बाद कई स्कूलों में सुरक्षा को लेकर गंभीर असर नजर आया। ओएसडीएवी स्कूल, अखिल भारतीय स्कूल, हिन्दू कन्या स्कूल, एसएस बाल सदन, दिल्ली पब्लिक स्कूल सहित दर्शन अकादमी के बाहर कड़ी सुरक्षा नजर आई। जहां पर सुरक्षा गार्ड मौजूद था।

स्टाफ सदस्यों के साथ मीटिंग कर जारी किए निर्देश : कई स्कूलों में सोमवार सुबह स्कूल प्रबंधन ने स्टाफ सदस्यों के साथ बैठक की। जिसमें सुरक्षा संबंधी कई निर्देश जारी किए गए। एक स्कूल संचालक ने कहा कि स्कूल चलाना काफी संवेदनशील हो गया है। कई स्कूल चला रहे उनके साथियों ने स्कूलों में पुरुष स्टाफ की ड्यूटी में परिवर्तन भी किया है। वहीं स्टाफ सदस्यों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

अभिभावकों में बना है डर : गुरुग्राम की घटना के बाद अभिभावक दहशत में हैं। अभिभावक मनोज कुमार, शिव कुमार, पुनीत कुमार ने बताया कि स्कूल के अंदर छात्र की हत्या होना बड़ा दुखद समाचार है। जब से यह घटना हुई है वे स्कूल में बच्चों को खुद छोड़कर आ रहे हैं और छुट्टी के समय खुद लेने के लिए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों की सुरक्षा राम भरोसे : प्राइवेट स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर कुछ हद तक तो गंभीर है। लेकिन सरकारी स्कूलों में तो बच्चे की सुरक्षा राम भरोसे है। कई स्कूलों में तो चौकीदार तक नहीं हैं। स्कूल में किसी भी समय प्रवेश किया जा सकता और किसी समय बाहर आ सकता है। सरकारी स्कूल में सीसीटीवी कैमरा तो दूर की बात अभी तक सुरक्षा गार्ड तक नहीं हैं। यह गंभीर विषय है।

अभिभावक अशोक कुमार सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में बच्चे के हत्या का काफी दुख है। स्कूल के अंदर हत्या होने से दूसरे बच्चों में दहशत है। ऐसे में स्कूल में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
2. अनिल कुमार ने बताया कि भारी भरकम फीस निजी स्कूल संचालक ले रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम करना भी उनकी जिम्मेवारी है। स्कूल के अंदर सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए। ताकि अगर कोई वारदात हो तो उसका पता चल सके।
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3. कमल गुप्ता ने बताया कि स्कूल के अंदर घटना से दहशत जरूर है। लेकिन ऐसी घटनाएं दूसरे बच्चों के अंदर डर पैदा करती है। सुरक्षा की कड़ी जरूरत है।
4. रूप लाल ने बताया कि स्कूल में गार्ड होना अनिवार्य है ताकि स्कूल में आने-जाने वाले के बारे में पूछताछ हो सके। स्कूल के अंदर व बाहर जाते समय उनके बारे में जानकारी होनी चाहिए।
विशेषज्ञ की सुझाव स्कूलों के लिए
1. सीसीटीवी कैमरे सही जगह लगे हों और काम कर रहे हो।
2. स्कूल में बाहर से आने वाले लोगों पर नजर रखी जाए
3. स्कूल बसों में स्टाफ उचित जांच पड़ताल के बाद रखा जाए।
4. अध्यापकों व अन्य स्टाफ सदस्यों की भी उचित जांच के बाद नियुक्ति हो
5. अभिभावकों के भी सुरक्षा को लेकर सुझाव लिए जाएं
6. शौचालयों में सुरक्षा के उपाय हों और छोटे बच्चों को अकेला शौचालय में न भेजा जाए
विशेषज्ञ के अभिभावकों के लिए सुझाव
1. स्कूल प्रबंधन को फीस देते हैं, इसलिए बेझिझक अपनी आशंकाओं के बारे में जानकारी हासिल करें
2. जरूरत पड़े तो संदिग्ध स्टाफ सदस्यों की वेरिफिकेशन के कागजात भी देखें
3. स्कूलों में सुरक्षा उपायों पर खुद भी जाकर गौर करें
5. बच्चों को भी लगातार शिक्षा दें कि वे अपनी सुरक्षा कैसे करें
6. जहां भी जरूरत महसूस हो, स्कूल प्रबंधन को सलाह देकर आवश्यक कदम उठवाएं
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