कम नहीं हो रहा बच्चों के बस्तों का बोझ
बस्ते के वजन को लेकर जारी सरकार के निर्देशों की हो रहा उल्लंघन, अभिभावक बोले- क्या करें बच्चों के भविष्य को नहीं कर सकते खराब
- सरकार ने जो गाइडलाइन दी हैं, उसके मुताबिक 2 से 3 किलो ज्यादा बनता है अकेले किताबों का वजन
अभ्यास कापियां ले जानी होती हैं, वे अलग
फोटो नंबर-05 से 07
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का न तो बस्तों का बोझ कम हो रहा और न ही उनके अभिभावकाें का इन पुस्तकों पर होने वाला खर्च ही कम हो रहा। सरकार द्वारा जारी आदेशों के बावजूद बच्चों के लिए भारी भरकम निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदवाई जा रही हैं। जिनका वजन बच्चों के बस्तों के वजन निर्धारित वजन से काफी ज्यादा बनता है। लेकिन मजबूरीवश अभिभावक ये पुस्तकें खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चे पढ़ाने हैं तो इस मनमानी का शिकार होना पड़ेगा।
बता दें कि सरकार द्वारा बस्तों के लिए बोझ निर्धारित किया गया है। जिसमें कक्षा पहली से पांचवीं तक अलग-अलग वजन तय किया है। लेकिन यहां पर निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवाई जा रही हैं। जो काफी संख्या में हैं। कई अनावश्यक पुस्तकें भी बच्चों व अभिभावकों पर थोपी जा रही हैं। जिस कारण बच्चों पर शिक्षा का बोझ कम और बस्ते का बोझ अधिक है।
अभिभावक बोले, क्या करें बच्चों के भविष्य को नहीं कर सकते खराब : अभिभावक भी निजी स्कूलों की मनमर्जी के आगे बेबस हैं। बुक स्टॉल पर अपनी बेटियों के लिए पुस्तकें खरीदने के लिए पहुंचे शहरवासी अमन ने बताया कि स्कूलों द्वारा पहली कक्षा से काफी अधिक वजन की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में लगा दिया जाता है। इस दौरान हमें अपने भविष्य को देखते हुए स्कूलों के नियमों का पालन करना पड़ता है।
वहीं मनु निर्वाणी ने कहा कि स्कूलों द्वारा एक ही दुकान पर किताबें भिजवाई जाती हैं। जिसमें उनका मूल्य फिक्स होता है। उन्होंने बताया कि स्कूल बच्चों के लिए अभिभावकों से किताबें तो मंगवा लेती है। लेकिन उन किताबों से बच्चों को पढ़ाया नहीं जाता। बल्कि स्कूल उसे खुद अपने पास रख लेते है। यह गलत है। अभिभावक अपनी बच्चों की शिक्षा के कारण चुप हैं।
ये वजन हैं निर्धारित : पहली से दूसरी कक्षा में दो किलो, तीसरी से पांचवीं दो से तीन किलो, छठी से सातवीं चार किलो, आठवीं से नौंवी चार से पांच किलो व दसवीं से बारहवीं तक पांच किलो तक का बोझ ही निर्धारित किया गया है। जिसे स्कूल फॉलो नहीं कर रहे हैं।
एक दुकान पर वजन करवाया गया तो अधिक निकला : पुस्तकें खरीद रहे अभिभावकों से जब एक दुकान पर खरीदी गई पुस्तकों का वजन करवाया गया तो एक स्कूल की पहली कक्षा की किताबों का वजन 3 किलो, छठी कक्षा की किताबों का वजन 6 किलो, नौवीं कक्षा की किताबों का वजन 7.5 किलो निकला। 12वीं कक्षा के लिए खरीदी गई एक अभिभावक की पुस्तकों का वजन 9 किलो निकला। इस तरह से लगभग प्रत्येक कक्षा में 4 से 5 किलो तक ज्यादा निकला। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल संचालक तर्क दे सकते हैं कि सभी पुस्तकें एक ही दिन थोड़ा ही मंगवाई जाती हैं। अब सवाल उठता है कि जब सभी किताबों की जरूरत नहीं होती तो खरीदवाई ही क्यों जाती हैं और खरीदवाई जाती हैं तो इनका प्रयोग करना चाहिए।
डीईओ जोगेंद्र हुड्डा का कहना है कि यदि किसी स्कूल की इस संबंध में शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।