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सामान्य बीमारी के ईलाज में भी लगते हैं दो से तीन दिन, 4 बार लाइन में लगकर पूरा हो पाता है ईलाज

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डॉक्टरों की कमी का खामियाजा भुगत रहे मरीज
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नसीब सैनी
कैथल। सुबह 9 बजकर 51 मिनट का समय है वार्ड नंबर 118 के सामने लोगों की भीड़ जमा है। डॉक्टर नहीं हैं। समय 9 बजकर 53 मिनट मेडिकल सर्जरी वार्ड नंबर 111 के सामने लोगों की भीड़ है। अंदर एक भी चिकित्सक नहीं हैं। समय 9 बजकर 54 मिनट। कान के डॉक्टर के इंतजार में मरीज वार्ड के बाहर हैं। सर्जरी ओपीडी वार्ड रूम नंबर 115 के बाहर 9 बजकर 57 मिनट तक कोई डॉक्टर नहीं था। बाहर भारी भीड़। इसी बीच वार्ड नंबर 111 से डॉक्टर उठकर 115 वार्ड में पहुंचकर ओपीडी शुरू करती हैं।
इस दौरान वार्ड नंबर 10 बजकर 5 मिनट पर दंत चिकित्सा विभाग और 10 बजकर 6 मिनट पर नेत्र जांच विभाग, 10 बजकर 6 मिनट पर महिला रोग विभाग, 10 बजकर 7 मिनट पर फिजियोथेरेपिस्ट व 10 बजकर 8 मिनट आयुर्वेदिक विभाग में डॉक्टर अपनी सीटों पर बैठकर मरीजों की देखभाल कर रहे थे।
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मुख्य ओपीडी में डॉक्टरों के न होने के कारण इलाज करने के लिए आए लोग सुबह 9 बजे से इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर न आने के कारण उनका मर्ज बढ़ता जा रहा था। व्यवस्था व डॉक्टरों को कोसते हुए लोगों में खूब रोष दिखा। अमर उजाला ने वीरवार सुबह जिला अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि डॉक्टरों के न मिल पाने के कारण लोगों को तीन से चार घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। ओपीडी डेढ़ से दो घंटे कई बार तो तीन घंटा देरी से शुरू हो पाती है।
जब डॉक्टरों के न पहुंचने की जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि वीरवार को पूरे अस्पताल में कार्यरत 19 में से 2 डॉक्टर सोनीपत में किसी ट्रेनिंग में, 3 डॉक्टर न्यायालय में पेशी पर, 1 डॉक्टर पाड़ला में ट्रेनिंग शिविर में भाग लेने गई हुई हैं। शेष बचे 13 में से एक इमरजेंसी, 2 महिला रोग विभाग, 2 चिकित्सक दाखिल वार्डों में राउंड पर, 2 डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर, एक डॉक्टर वार्ड में दौरे पर कुल 13 डॉक्टर दूसरी जगहों पर ड्यूटी पर थे। जो करीब साढ़े दस बजे तक अपनी सीटों पर पहुंच गए थे।
पूछने पर एसएमओ का चार्ज संभाल रहीं डा. रेनू चावला ने बताया कि चिकित्सकों के न होने के कारण लोग तो परेशान हैं ही, विभाग में स्टाफ को भी परेशानी हो रही है। कई-कई ड्यूटियां करके डॉक्टर किसी तरह से काम चला रहे हैं। डॉक्टरों की संख्या बढ़े तो राहत मिल सकती है।

साहब 9 बजे से खड़े हैं, डॉक्टर पता नहीं कब आएंगे : 111 नंबर कमरे के बाहर इंतजार कर रहे मरीजों आंचल रानी कैथल, चीका से आए देवेंद्र, कैथल से दुर्गेश, अटैला से आए दीपक ने कहा कि 9 बजे से वे यहां इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टर पता नहीं कब आएंगे।
कान के डॉक्टर के इंतजार में बैठे बात्ता से बिमला, महेंद्र हथो ने कहा कि वे कान का इलाज करवाने के लिए आए हैं।
सर्जरी ओपीडी के बाहर मरीज पंजाब के अरनो से आए सरदारा सिंह ने कहा कि तीन दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। इसी प्रकार से 118 नंबर वार्ड के बाहर सेरहधा से कर्मबीर सिंह, खरकां से सुखदेव, बलसंती वे संतोष देवी ने कहा कि वे डॉक्टर के इंतजार में खड़े हैं। डॉक्टर आएंगे भी या नहीं, पता नहीं। कहने को यह मिनी पीजीआई है, लेकिन देखने के लिए डॉक्टर नहीं हैं।

1500 से अधिक की ओपीडी, 4 बार लाइनों में लगकर कई दिनों में होता है इलाज पूरा : डॉक्टरों कमी के कारण जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को एक नहीं चार बार लाइन में लगना पड़ता है। सबसे पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लाइन, इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन, डॉक्टर ने टेस्ट लिख दिया तो लैब के बाहर लाइन, फिर रिपोर्ट दिखाने के लिए डॉक्टर के बाहर लाइन और यदि डॉक्टर चला गया तो अगले दिन फिर से आकर लाइन में लगकर इलाज करवाना पड़ता है। ये हाल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का है। जहां 10 से 12 डॉक्टर हर रोज लगभग 1500 तक ओपीडी संभाल रहे हैं।
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ये है जिला अस्पताल में मुख्य रुप से स्टाफ की स्थिति
स्वीकृत भरे हुए खाली पद
डॉक्टर 55 19 6
स्टॉफ नर्स 90 31 59
क्लर्क 6 2 4
लैब सहायक 14 7 7
ऑपरेशन
थियेटर सहायक 10 2 8
कुल 301 109 192 (नियमित स्टाफ)

मच्छरों ने खाली करवाया वार्ड : वार्ड नंबर 111 में सुबह दस बजे तक लोग लाइनों में लगे हुए थे। इसके बाद चिकित्सक आईं तो यहां मच्छरों की भरमार मिलीं। डेंगू का प्रकोप होने के कारण इस वार्ड को ही खाली करवा दिया गया। डॉक्टर ने दूसरे वार्ड में बैठकर मरीजों का इलाज किया।

एक बीमारी के इलाज में लगते हैं दो से तीन दिन, चार बार लाइन में लगकर पूरा हो पाता है इलाज

फोटो संख्या-21 से 27
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