पिता के आदेश पर श्रीराम चले वनवास
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में रविवार की रात मंथरा द्वारा कैकेई को भड़काने के बाद राजा दशरथ के आदेश पर राम को वनवास दिए जाने का मंचन किया गया।
इसे पूर्व राजकीय कॉलेज के कामर्स संकाय के प्रोफेसर राजेंद्र अरोड़ा नेे दीप प्रज्जवलित किया। इस मौके पर उनके साथ अमित मित्तल व दीपक बसीन भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सबसे पहले क्लब के सभी कलाकारों ने मां सरस्वती की प्रार्थना की गई। जब राजा दशरथ की ओर से राम के राज तिलक का एलान किया जाता है तब सभी देवता मिलकर मां सरस्वती को इसके लिए प्रार्थना करते हैं कि वह किसी न किसी तरीके से रावण के अंत के लिए राम को वनवास दें। इसके बाद मां सरस्वती मंथरा की जुबान पर आती है जो कैकेई को भरत को राज दिलाने के लिए उकसाती है। कैकेई राजा दशरथ को अपने वरदान का हवाला देकर राम को वनवास देने की मांग करती है। वह राजा दशरथ से कहती है कि हे राजा आपके प्राण बचाने पर आपने मुझे दो वर दिए थे। आज मेरे वर को पूरा करते हुए भरत का राजतिलक और राम को वनवास दे दें। इसके बाद राम, लक्ष्मण व सीता तीनों माताओं से वनवास जाने के लिए आज्ञा लेते हैं। राम का कैकेई से संवाद होता है। जिसमें वे कहते हे मां मैं वनवास चला, पिता की आज्ञा का पालन कर चला। राम के वनवास जाने की सूचना पर पूरे अवध के लोगों के आंसू बहते हैं और वह राम को वन में न जाने की प्रार्थना करते हैं। लेकिन राम मर्यादा का पालन करतेे हुए वन को चले जाते हैं। मंचन में चन्नी ने राम, सोनू ने लक्ष्मण, अजय सैनी ने सीता, रमेश सैनी ने केकई, मेहर सिह ने मंथरा का रोल अदा किया। इस मौके पर क्लब प्रधान पुनीत चौधरी, महावीर गर्ग, निर्देशक धर्मबीर असीजा, रमेश चंद जांगड़ा, जगरूप सैनी, संजीवन शर्मा, पदम लटकानियां, जयप्रकाश गुप्ता व गौरव सहित अन्य मौजूद रहे।
श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में आयोजित रामलीला का चौथा दिन
फोटो नंबर-15