150 से अधिक देशों में हो रहा हिंदी का अध्ययन व अध्यापन : प्रो. घई
डीएवी कॉलेज चीका में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
फोटो नंबर-29
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला चीका। हिंदी विभाग एवं उच्चत्तर शिक्षा महानिदेशालय पंचकूला के तत्वावधान में डीएवी कॉलेज चीका में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी में विश्व हिंदी संस्थान कनाडा के अध्यक्ष प्रोफेसर सरन घई व नॉर्वे के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर सुरेश चंद्र शुक्ला ने विशेष रूप से शिरकत की। इसके अतिरिक्त इस संगोष्ठी में बीज वक्ता के रूप में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बाबू राम, ग्लोबल हिंदी साहित्य शोध संस्थान भारत के अध्यक्ष डॉ. कामराज सिंधु, दयाल सिंह कालेज करनाल से डॉ. बलबीर सिंह और शहीद ऊधम सिंह राजकीय महाविद्यालय मटक माजरी से डॉ. कृष्ण कुमार ने बतौर मुख्य वक्ता, विशिष्ट वक्ता के रूप में भाग लिया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर सरन घई ने कहा कि आज कनाडा में विश्व हिंदी संस्थान और भारतीय विद्या संस्थान जैसी संस्थाएं हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार प्रसार के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। यह संस्थाएं अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मेलन आयोजित करती हैं। यही कारण है कि कनाडा और विश्व के 150 से अधिक देशों में हिंदी भाषा का अध्ययन और अध्यापन हो रहा है। इन प्रयासों को देख कर कहा जा सकता है कि हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं हो सकता। नार्वे से आए प्रोफेसर शुक्ला ने नार्वे की सांस्कृतिक विविधता पर प्रकाश डालते हुए वहां पर हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों का वर्णन किया। संगोष्ठी में डॉ. बलबीर सिंह व डॉ. कृष्ण कुमार ने भी वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों और हिंदी साहित्य के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. रमेश लाल ढांडा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस संगोष्ठी में देश प्रदेश के 120 प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।