फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मार्केट में 5800 रुपये प्रति एक हजार है ईंटों का रेट, गांवों में विकास कार्यों के लिए निर्धारित है 4725 रुपये प्रति एक हजार

विज्ञापन
विज्ञापन
मार्केट में 5800 रुपये प्रति एक हजार है ईंटों का रेट, गांवों में विकास कार्यों के लिए निर्धारित है 4725 रुपये, एडीसी से मिलने पहुंचे सरपंच बोले-
विज्ञापन

कैसे करवाएं विकास कार्य, एक हजार रुपये से अधिक की राशि ग्राम पंचायतों को अपने पास से करनी पड़ रही है खर्च
एक सरपंच तो बोले- साहब खाद्य आपूर्ति विभाग में एक अधिकारी ईंटों के रेट बढ़ाने के लिए कर रहे हैं रिश्वत की मांग
सरपंचों ने एडीसी सतबीर कुंडू से मुलाकात कर ईंटों के रेट बढ़ाए जाने की मांग की
फोटो नंबर 12
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। ग्रामीण विकास कार्यों में ईंटों के रेट आड़े आ रहे हैं। जिला सरपंच एसोसिएशन ने बुधवार को एडीसी सतबीर कुंडू से मुलाकात कर ईंटों के रेट बढ़ाए जाने की मांग की है। ताकि रुके हुए विकास कार्य पूरे करवाए जा सकें। एडीसी ने सरपंचों को आश्वासन दिया है कि वे मार्केट से कोटेशन लेकर आस-पास के जिलों के रेट अनुसार ईंटों का रेट निर्धारित करवाएंगे।
जिला प्रधान गज्जन सिंह गोबिंद पुरा, ब्लॉक प्रधान राजेंद्र फौजी देवबन, ओमप्रकाश साकरा सरपंच खेड़ी साकरा, जिला उपाध्यक्ष तिरलोचन सिंह विर्क फर्श माजरा, बलविंद्र भींडर प्रभोत, अमरेंद्र सिंह खारा सीवन, हरपिंद्र सिंह तारावाली, सरपंच नरेश हरसौला, सरपंच गुरनाम खेड़ी शेरू एडीसी कार्यालय में पहुंचे। जहां सरपंचों ने एडीसी को बताया कि मार्केट में मेटिरियल ईंट, रेता, बजरी, ब्लॉकों के दाम सरकारी रेटों से काफी बढ़ गए हैं। बाजार में 5800 रुपये प्रति हजार ईंट मिल रही है। जबकि सरकार द्वारा निर्धारित रेट 4725 प्रति हजार रुपये है। जिससे कार्यों को करने में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ईंटों के भाव बाजार भाव पर किए किए जाएं। ताकि ग्राम पंचायतों का कार्य सुचारु रूप से चल सके। सभी गांवों में लाखों रुपये के विकास कार्य रुके हुए हैं। एडीसी सतबीर सिंह कुंडू ने आश्वासन दिया कि डीएफएससी व भट्ठा मालिकों के बातचीत करके समाधान किया जाएगा।
विज्ञापन

पंचायतों को उठाना पड़ रहा है अतिरिक्त खर्च : सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान गज्जन सिंह गोबिंदपुरा ने कहा कि मार्केट में रेट करीब 5800 रुपये है। जबकि ग्राम पंचायतों को 4725 रुपये प्रति एक हजार ईंट का निर्धारित है। शेष खर्च पंचायतों द्वारा उठाना पड़ रहा है। जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अधिकतर पंचायतें ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि वे इस अंतर को अपने पास से खर्च कर सकें। इसी कारण जिले भर में गांवों में लाखों रुपये के विकास कार्य रुके हुए हैं। जब तक प्रशासन ईंटों के रेट नहीं बढ़ाता, तब तक काम पूरे होने मुश्किल हैं। उनकी मांग है कि शीघ्रता से सरपंचों की मांग पर ध्यान दिया जाए। ताकि विकास कार्य पूरे हो सकें।
विज्ञापन

एक सरपंच बोले, डीएफएससी कार्यालय में एक अधिकारी मांग रहे हैं रिश्वत : एडीसी से मिलते समय एक सरपंच तो यहां तक बोल गए कि डीएफएससी कार्यालय में एक अधिकारी ईंटों के रेट बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। इस बात पर एडीसी ने कहा कि चेयरमैन वे हैं, उन्हें ही रेट बढ़ाने हैं। यदि कोई गलत तरीके से इस तरह की मांग करता है तो उसे चेक करवाया जाएगा। हालांकि कोई लिखित शिकायत ऐसी नहीं हैं। एडीसी ने कहा कि ईंटों के जो भी रेट मार्केट अनुसार माकूल होंगे, वे किए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें