फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शुगर मिल के डायरेक्टर्स ने कहा-मंत्री मनीष ग्रोवर को उनकी चाय-समोसे से परेशानी है तो खुद क्यों लेकर गए मिल से महंगे गिफ्ट(चांदी

विज्ञापन
विज्ञापन
शुगर मिल के डायरेक्टर्स ने कहा- मंत्री मनीष ग्रोवर को उनकी चाय-समोसे से परेशानी है तो खुद क्यों लेकर गए मिल से महंगे गिफ्ट
विज्ञापन

मंत्री ने शुगर मिल में पेराई सत्र के शुभारंभ अवसर पर कहा था-डायरेक्टर केवल चाय समोसे के लिए नहीं हैं..किसानों की आवाज भी उठाएं
डायरेक्टर्स ने बैठक करके जताई आपत्ति, कहा- माफी नहीं मांगीं तो पूरे प्रदेश के डायरेक्टर्स की बैठक बुलाकर करेंगे विरोध
चिप घोटाले में बोले, कहा जिस दिन से कांटा लगा, उसी दिन से हो जांच
फोटो नंबर-01
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बीते शुक्रवार को शुगर मिल में पेराई सत्र के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के उस बयान पर मिल के डायरेक्टरों ने वीरवार को प्रेस कांफ्रेंस करके रोष जताया है। जिसमें मनीष ग्रोवर ने कहा था कि डायरेक्टर महज चाय-समोसे व पर्ची के लिए नहीं हैं, वे किसानों की आवाज उठाएं। मिल में डायरेक्टर्स ने कहा है कि यह बयान निंदनीय है। डायरेक्टर्स की मंत्री से मांग है कि वे अपने बयान के लिए माफी मांगें। यदि ऐसा नहीं होता है तो डायरेक्टर प्रदेश भर के मिल डायरेक्टर्स की बैठक बुलाकर रोष जताएंगे।
मिल के विश्राम गृह में सभी डायरेक्टरों ने प्रेसवार्ता कर मंत्री पर निशाना भी साधा। शुगर मिल के डायरेक्टर एडवोकेट जितेंद्र कादियान ने कहा कि मंत्री ने पेराई सत्र के शुभारंभ पर चिप घोटाले को लेकर डायरेक्टरों पर एक अभद्र भाषा का प्रयोग किया। कादियान ने कहा कि यदि मंत्री जी को डायरेक्टरों के चाय समोसे खाने पर कोई आपत्ति है तो वे खुद मंहगे मंहगे तोहफे (चांदी का रथ) मिल प्रशासन की ओर से क्यों लेकर जाते हैं? क्यों इतना सारा खर्च केवल भोजन पर किया गया? उन्होंने कहा कि मंत्री इस बयान पर डायरेक्टरों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री इस ब्यान पर माफी नहीं मांगते तो जल्द ही एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें मंत्री के विरोध का फैसला लिया जाएगा। मंत्री केवल अपनी पार्टी का बखान करते हैं। उन्हें किसानों की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। डायरेक्टर्स अब मिल में चाय भी अपने खर्च से पीएंगे।
विज्ञापन

मंत्री को दो साल पहले की थी क्षमता बढ़ाने की मांग, आज तक नहीं हुई सुनवाई : जितेंद्र कादियान ने कहा कि निदेशक मंडल की ओर से दो वर्ष पहले मंत्री को शुगर मिल की क्षमता बढ़ाने के लिए ज्ञापन दिया जा चुका है। लेकिन इस पर कोई कार्य नहीं हुआ है। प्रत्येक सीजन में 60 लाख क्विंटल गन्ना शुगर मिल में आता है। लेकिन क्षमता न होने के कारण यहां पर 10 लाख क्विंटल गन्ना किसानों को अन्य मिलों में लेकर जाना पड़ता है। इसके अलावा कैथल मिल को छोड़कर अन्य शुगर मिलों की क्षमता बढ़ाई गई है। जबकि ऐसा कैथल में नहीं हुआ है। जबकि किसान तो शुगर मिल के घाटे के बारे में निदेशकों से पूछते हैं।
शीरा के स्टोरेज के लिए भी नहीं है कोई व्यवस्था : निदेशक मंडल का यह भी कहना था कि शुगर मिल में शीरा के स्टोरेज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2016 में 635 रुपये प्रति क्विंटल बिकता था। जो इस वर्ष घटकर 216 रुपये प्रति क्विंटल बिकता है। यह केवल स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होने के कारण है।
चिप घोटाले में जिस दिन से कांटा लगा, उसी दिन से जांच कराने की भी मांग : निदेशक जितेंद्र कादियान ने चिप घोटाले पर कहा कि इस पर उसी दिन से बिल निकलवाकर जांच की जानी चाहिए। जिस दिन से यह लगा हुआ है। इसके अलावा शुगर मिल में नया शिरा टैंक, मिनरल वाटर प्लांट, प्लास्टिक बैग प्लांट व मिल की क्षमता बढ़ाने की मांग को पूरा किया जाए। इस मौके पर निदेशक शमशेर सिंह, जोगिंद्र सिंह, दीवान सिंह, बंसी लाल व सुभाष बारना मौजूद रहे।
विज्ञापन

क्या है विवाद : 16 नवंबर को मिल में पेराई सत्र के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने मिल के प्रति चल रही नारेबाजी के मुद्दे को उठाया था। जिस पर मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा था कि डायरेक्टरों से किसानों को जवाब लेना चाहिए। वे महज चाय या समोसा या पर्ची के लिए नहीं हैं। मंत्री के इसी बयान पर वीरवार को डायरेक्टर्स ने रोष जताया है। इसी कार्यक्रम में मंत्री सहित कई अतिथियों को मिल की ओर से महंगा उपहार दिया गया था। जिसमें संभवत: चांदी का रथ बताया जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें