कोर्ट की कार्यवाही को एसएचओ कर रहे थे रिकॉर्ड, कोर्ट ने किया तलब
- कार्यवाही मोबाइल में रिकॉर्ड करने की बात पर विवाद, कई दौर की बैठक के बाद शाम को कोर्ट से निकले एसएचओ
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सिविल जज अमित शर्मा की अदालत में एक एसएचओ द्वारा कोर्ट की कार्यवाही को मोबाइल में रिकॉर्ड करने की बात पर बुधवार को विवाद हो गया। डीएसपी स्तर के अधिकारियों की कई दौर की बैठक के बाद शाम 5 बजे के बाद ही एसएचओ कोर्ट से बाहर आए। बताया जा रहा है कि न्यायालय में इस बात को गंभीरता से लिया गया और एसएचओ से कार्यवाही रिकॉर्ड किए जाने के बारे में जवाब तलब किया गया। साथ ही मोबाइल जमा करवा लिया गया है। मामले को लेकर सभी पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। वहीं कोर्ट का समय पूरा होने के चलते कोर्ट द्वारा जारी किए गए आदेशों की जानकारी नहीं मिल पाई है।
मिली जानकारी के अनुसार अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत में किसी वारंट की तामील करवाने को लेकर एक एसएचओ कोर्ट में पहुंचे थे। जहां उन्हें न्यायालय की कार्यवाही को रिकॉर्ड किए जाने की बात पर तलब कर लिया गया। उनसे इस बारे में जवाब तलब किया गया। मामले की जानकारी मिलते ही डीएसपी स्तर के दो अधिकारी भी कोर्ट में पहुंचे। दोपहर को मामला निपटता नजर आ रहा था। लेकिन शाम तक किसी बात की सूचना कोर्ट से बाहर नहीं आ पाई। बाद में शाम को फिर से डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं। बताया जा रहा है कि पुलिस के आला अधिकारियों ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि वे संबंधित एसएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेंगे। इसके बाद एसएचओ कोर्ट से बाहर आए।
लिखित कार्रवाई हुई, माफी मांगी या कुछ और लिखवाया, नहीं मिल पाई जानकारी :
बताया जा रहा है कि न्यायालय के सख्त रुख के चलते इस मामले में लिखित में कार्रवाई जरूर की गई। इस कार्रवाई में एसएचओ ने माफी मांगी या कुछ और लिखा, इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई। साथ ही न्यायालय का समय खत्म होने के चलते आदेशों के बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई।
एसएचओ से लेकर एसपी तक के अधिकारियों ने साधी चुप्पी : इस बारे में एसएचओ से लेकर डीएसपी सतीश गौतम, एसपी आस्था मोदी के मोबाइल पर कई-कई बार फोन किए गए, लेकिन किसी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया। पुलिस अधिकारी मामले को दबाते नजर आए।
आज पता चलेगा न्यायालय के फैसले का : बुधवार शाम कोर्ट बंद हो जाने के चलते आदेशों की जानकारी नहीं मिल पाई। वीरवार को ही इस मामले में कोर्ट के रुख व कार्रवाई के बारे में जानकारी मिल सकती है।
बता दें कि इससे पूर्व अदालत में एक पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा वर्दी पहनकर ना आने के चलते विवाद हो चुका है।