आकाश में छाए धूल और धुएं के गुबार से लोग परेशान
कलायत। पिछले चार दिनों से नगर व आसपास के क्षेत्र में अंधेरे का सा आलम बना हुआ है। लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि आखिरकार यह धुंध है, धूल है या फिर धुआं है। लोगों का कहना है कि सर्दी के मौसम में धुंध पड़ना प्रकृति का नियम है मगर इस समय सर्दी वाली बात तो लागू ही नहीं हो रही। इस समय वातावरण में जो अंधेरे की स्थिति बनी है उससे आंखों में जलन होने के साथ पर्यावरण पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिर यह क्या है जिसके कारण लोगों को सांस लेने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। रविवार बाद दोपहर से खराब हुआ मौसम वीरवार को पूरे दिन भी लगभग ज्यों को त्यों रहा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक डा. कुलदीप ने बताया कि जिस प्रकार से आंखों में जलन होने की बात कही जा रही है वह धुल अथवा धुंध की नहीं हो सकती। यह कोई ऐसा धुआं हो सकता है, जिसमें कोई रसायन मिला हो वहीं आंखों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आंखों में होने से बचने के लिए वाहन चलाते समय जहां आंखों को पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की आंखों पर ज्यादा ही प्रभाव पड़ गया हो तो ऐसे में नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिल आंखों में दवा डालनी चाहिए।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि यह धुंध ही है। इस समय न्यूनतम तापमान 13 डिग्री से नीचे आ गया है। सुबह के समय आर्द्रता का लेवल 95 प्रतिशत बना हुआ है। इस मौसम में हलकी धुंध का आना स्वाभाविक है। दिवाली के समय फूंके गये बारूद व छुट्टियों का फायदा उठा कर किसानों द्वारा फूंकी गई पराली का धुआं धुंध में शामिल होकर स्मॉग की स्थिति बन गई है जो आंखों व पर्यावरण को प्रभावित कर रही है।
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