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गांव गुलियाणा के बुजुर्गों ने लगाया डीजे पर प्रतिबंध तो युवओं ने करवा दी सार्वजनिक शराब बंदी

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गांव गुलियाणा के बुजुर्गों ने लगाया डीजे पर प्रतिबंध तो युवाओं ने करवा दी सार्वजनिक शराब बंदी
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नसीब सैनी
कैथल।
जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित गांव गुलियाणा के युवाओं ने सरकारी नौकरियों की ऐसी राह पकड़ी की आस-पड़ोस के गांव के युवा भी प्रेरणा लेने लगे हैं। पहले से ही फौजियों के इस गांव में पिछले 6 साल में लगभग 250 से ज्यादा युवाओं ने सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। गांव में डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया था। युवाओं ने डीजे पर प्रतिबंध की बात तो मान ली, लेकिन अपनी भी बात रखी और कहा कि गांव में शराब भी नहीं बिकेगी। जिसे पूरे गांव ने स्वीकार कर लिया। फैसला लिया गया कि कोई अपने घर बैठकर शराब पीना चाहे तो पी सकता है। लेकिन शराब पीकर हुड़दंग नहीं करेगा। गांव में न तो शराब बिकेगी और न ही 2 बोतल से अधिक कोई शराब लेकर चलेगा।
शुरू में लगभग दर्जन भर लोगों को 11 हजार रुपये का जुर्माना भी हुआ। जिसकी नतीजा यह है कि आज गांव की सीमा में शराब नहीं बिकती और न ही कोई ठेका है। इसी बीच पहले से ही सेना व अन्य सुरक्षा बलों में चयनित गांव के युवाओं ने बेरोजगार युवाओं को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। बिना किसी सरकारी सहायता के गांव की खाली पड़ी जमीन में 24 घंटे में हर तरह के मौसम व समय सुबह, शाम, रात, दोपहर, धूप-छांव व बरसात में कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। लकड़ियों के माध्यम से दंड बैठक निकालने के जुगाड़ सहित देशी ढंग से तैयार किए गए ट्रेक पर 300 से अधिक युवा आज खूब पसीना बहाते हैं।
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प्रशिक्षण अभियान से जुड़े युवा मजेंद्र सिंह, गांव के युवा आनंद राविश ने बताया कि शराब बंदी व सेना में भर्ती युवाओं की प्रेरणा से 6 साल में 250 से अधिक युवा नौकरी हासिल कर चुके हैं। भारतीय सेना, एयरफोर्स, नेवी, बीएसएफ, हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ पुलिस सहित कई विभागों में युवाओं की नौकरी लगी हैं। आज युवाओं में एक दूसरे से पहले नौकरी हासिल करने की होड़ है। पहले से चयनित फौजी जगदीश, राजबीर, सुनील, राजबीर सिंह सहित अन्य ने युवाओं को प्रेरित किया। पूरे गांव में 3500 वोट हैं और जनसंख्या 7000 है। गांव में लगभग 1200 परिवार हैं, जिसमें से आज 700 से अधिक परिवारों में सरकारी नौकरी हैं।
अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद की जाती है। इसके लिए युवा क्लब व जयहिंद क्लब बनाया गया है। कबड्डी, खो-खो व एथलेटिक्स की प्रतियोगिताएं होती हैं। जिसमें नकद इनाम दिया जाता है।

अब स्टेडियम की है मांग : इस गांव के युवाओं की एक ही मांग है कि जब वे अपने स्तर पर इतनी नौकरियां हासिल कर सकते हैं तो यहां स्टेडियम बन जाए तो सफलता की दर ओर अधिक बढ़ जाएगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, धर्मपाल शर्मा सहित कई नेता यहां स्टेडियम का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन आज तक यहां स्टेडियम तो क्या सुविधा सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं दी गई। इस गांव के पृथ्वी राविश जहां विदेशों में राजदूत रह चुके हैं। वहीं इस समय राजनारायण डायरेक्ट आईएएस भी चयनित हुए हैं। साथ ही कई बड़े अधिकारी कई विभागों में कार्यरत हैं।

शराब बिक्री बंद हुई तो बंद हो गए झगड़े : सरपंच राजेंद्र सिंह का कहना है कि शराब की बिक्री, डीजे बजाने पर आज भी प्रतिबंध है। युवाओं का रुझान खुद ही नौकरियों की ओर बढ़ा है। शराब बंदी का पूरा असर देखने को मिला। युवा जब-जब किसी मदद को कहते हैं, उसके लिए पंचायत हर समय तैयार रहती है। पिछले पांच-छह सालों में एक भी ऐसा मामला नहीं आया। जिसमें किसी ने शराब पीकर झगड़ा किया हो।
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शराब बिक्री पर बंदी का है पूरा असर : एसएचओ राजौंद रामकुमार का कहना है कि गांव गुलियाणा पूरी तरह से शांतिप्रिय गांव है। इस गांव में अपराध के संबंध में केस न के बराबर दर्ज हैं। छोटे-मोटे झगड़े गांव में ही निपट जाते हैं।

ये हैं गांव के सर्वसम्मति से लिए गए फैसले :
1. विवाह समारोहों में डीजे पर प्रतिबंध, डीजे बजाने पर 11000 रुपये जुर्माना
2. गांव की हद में शराब बिक्री पर रोक, 2 बोतल से अधिक शराब कोई लेकर नहीं चल सकता-शराब बेचते हुए पाए जाने पर 11000 हजार रुपये जुर्माना
3. शराब पीकर गांव में चिल्लाने व झगड़ा करने पर 2100 रुपये जुर्माना
4. गांव में लाउड स्पीकर व किसी भी माध्यम से ऊंची आवाज में गाने बजाने पर 2100 रुपये
5. म्यूजिक सिस्टम लगाकर ऊंची आवाज में सामान बेचने वाले फेरी वालों को पहली बार में छूट, दूसरी बार में 2100 रुपये जुर्माना।


- छह साल बाद गांव में लगभग 250 से ज्यादा युवाओं ने सरकारी नौकरियां हासिल की
-1200 परिवारों में से लगभग 700 परिवारों के सदस्य हैं सरकारी नौकरी में
- अधिकतर सेना, पुलिस, बीएसएफ, एयरफोर्स व नेवी में हुए नियुक्त
- आज गांव में न बिकती है शराब न ही है कोई ठेका

फोटो संख्या-11, 12, 13 व 14
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