सिर से उठा पिता का साया तो मां ने निभाई दोनों भूमिका
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ गया तो वो मां थी..जिसने माता व पिता दोनों की भूमिका निभाई और अपनी बेटियों को पढ़ा लिखाकर सफल बनाया। जूडो में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी की मां दर्शना देवी ने मेहनत मजदूरी करके अपनी बेटियों को पढ़ाया और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
दर्शना की दो बेटियां व एक छोटा बेटा है। वह अपने परिवार के लालन पालन के लिए खेतों में मजदूरी कर अपना गुजारा करती हैं। बारहवीं कक्षा पास कर चुकी उसकी छोटी बेटी आशा जूडो की नेशनल खिलाड़ी है। जो एक बार इंडियन कैंप में भी हिस्सा ले चुकी है। दर्शना ने बताया कि उसके पति मदन लाल कैंसर से पीड़ित थे। जिनका वर्ष 2011 में निधन हो गया। उसने बताया कि पति की मृत्यु के समय उसकी बड़ी बेटी 12 वर्ष व छोटी बेटी महज पांच वर्ष की थी और उसका छोटा बेटा संदीप केवल दो वर्ष का था। जिसके बाद उसने मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करवाई। दर्शना ने बताया कि उसकी बड़ी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाकर उसका विवाह भी करवा दिया।
बेटियां है बेटों से भी बढ़कर
दर्शना ने बताया कि समाज की सोच को बदलने की जरूरत है। कहा कि बेटियां बेटों से भी बढ़कर है। जो हमेशा ही कड़ी मेहनत करके उन्नति करती है। उसने बताया कि उसकी छोटी बेटी आशा लड़कों से कम नहीं है। जब वह बीमार होती है तो वह देर रात के समय में भी बिना किसी भय के बाजार से दवाई लेकर आती है। उसने कहा कि समाज को अपनी सोच को बदलकर बेटियों को आगे लाना होगा। जिससे समाज की बेटियों के प्रति बनी गलत अवधारणा समाप्त हो सके।
दूध बेच कर रही गुजारा
दर्शना ने बताया कि पहले वह मजदूरी करके अपना गुजारा करती थी। लेकिन अब बीमारी की वजह से मजदूरी करने के लिए काफी कम जाती है। उनके पास एक भैंस है जिसका दूध बेच कर वह अपने घर खर्च वहन करती है।
कई पदक हासिल कर चुकी है आशा
आशा ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से 57 किलोग्राम वग में जूडो खेल रही है। उसने आठवीं कक्षा में स्कूली स्तर पर जूडो की गेम की शुरुआत की थी। स्कूल में कोच राजेश आर्य ने जूडो के लिए प्रेरित किया तो इसमें रुचि बन गई। उसका सपना है कि इंटरनेशनल स्तर पर भारत की ओर से खेलकर गोल्ड हासिल करे।