पूंडरी। गेहूं व धान के फानों व अवशेषों को जलाना पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन है। ईपीसी एक्ट 1981 की धारा 188 के तहत सजा जुर्माना भी हो सकता है। यह जानते हुए भी किसान सड़क के साथ वाले खेतों में फसलों के बचे अवशेषों में आग लगाते रहते है। बीते सालों में धान व गेहूं के बचे अवशेषों में आग लगाने से सड़क पर फैले धुएं की वजह से कई लोग चोटिल होने के साथ अपनी जान भी गवां चुके हैं। जानकारी के अनुसार अभी कुछ दिनों पहले डीएवी पब्लिक स्कूल पूंडरी में कार्यरत एक युवा पूंडरी से जींद जाते हुए सडक़ पर फैले धुएं की वजह से दुर्घटनाग्रस्त होकर जान गवां चुका है।
किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी व प्रवक्ता बिजेंद्र राणा का भी मानना है कि सड़क के साथ लगते खेतों में किसानों को कभी भी आग नहीं लगानी चाहिए क्योंकि सड़क के साथ वाले खेतों में आग लगाने से सड़क पर फैले विषैले धुएं की चपेट में आकर कोई बड़ा हादसा घट सकता है और सड़क के किनारों पर खड़े पेड़ों को भी नुकसान पहुंचता है।
खेतों में आग बचे फानों में आग लगाने से दोहरा नुकसान होता है
फसलों के बचे अवशेषों में आग लगाने पर खंड तकनीकी अधिकारी पूंडरी डॉ. संजीव कुमार व एडीओ पूंडरी बलवान सिंह ने बताया कि गेहूं व धान के अवशेषों को जलाने से भूमि की ऊपरी 6 इंच की उपजाऊ परत को नुकसान पहुंचने के साथ भूमि को उपजाऊ बनाने वाले लाभदायक सूक्ष्म जीव भी जल कर मर जाते हैं। जिस कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर हो जाती है और किसानों को जमीन में पैदावार नहीं मिल पाती।
क्या कहना है वन अधिकारी का
ऋषिराज पूंडरी रेंज फारेस्ट आफिसर ने बताया कि किसानों की गलती के कारण वन विभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभाग पता लगते ही जहां आग लगी होती है वहां पहुंचता है लेकिन किसान वहां से खिसक चुके होते हैं फिर भी विभाग गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करता रहता है। पिछले वर्ष लगभग 40 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और कइयों ने जुर्माना भी भरा है।