सजे माता के दरबार, आज होगी शैलपुत्री की पूजा
- जोत प्रचंड करने और कलश स्थापना का उत्तम समय सुबह 4.40 से 9.10 तक
फोटो नंबर-27 व 28
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मां भगवती के पावन नवरात्र बुधवार से शुरू हो गए। नवरात्र को लेकर मंदिरों को भव्य ढंग से सजाया गया है। मंगलवार से ही नवरात्र को लेकर बाजार में भी रौनक बढ़ गई। शिव शक्ति धाम मंदिर के संचालक पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने बताया कि कन्या राशि से लग्न का प्रारंभ, कन्या राशि का दिन बुधवार और कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश है। इसलिए इन तीनों का योग अति उत्तम माना जाएगा। कुंडली के अनुसार लग्न श्रेष्ठ योग है। शुक्र, बुध, गुरु, चंद्रमा चारों ग्रह धन स्थान में होने से नवरात्र में बहुत उत्तम संयोग बन रहा है।
ऐसे करें मां को प्रसन्न : शास्त्री ने बताया कि सुबह स्नान करने के बाद चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर माता को बैठाएं। उनके सामने जोत जलाएं। बगल में कलश स्थापित करें। कलश में जौ बोए और इसमें सुपारी व चांदी का सिक्का डालें। इसके बाद अशोक या आम के पत्ते, फिर नारियल कलश में रखें। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए माता को कमल का फूल या कमल चढ़ाएं। कलश स्थापना का समय और जोत प्रचंड का उत्तम समय सुबह 4.40 से 9.10 तक रहेगा। व्याधि से बचने के लिए माता को जायफल चढ़ाएं। विशेष कामना के लिए माता को गुड़हल का फूल और फल अर्पण करें और आरती करें व दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
शारदीय नवरात्रों को लेकर सज गए हैं मंदिर व माता के श्री विग्रह
कलायत। शारदीय नवरात्र को लेकर नगर के सभी मंदिरों में मां के श्री विग्रह का शृंगार किया गया है। नगर में माता के कई मंदिर हैं जिनमें विशेष तौर पर श्री कपिल मुनि धाम स्थित मां कात्यायनी मंदिर, अनाज मंडी में श्री दुर्गा मंदिर पुराने बाजार में बना मां भवानी मंदिर तथा कैंची चौक पर बना मां बनभौरी वाली का मंदिर प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में हर रोज मां की पूजा होने के साथ साथ यहां पर अखंड जोत भी प्रज्ज्वलित हो रही हैं।
श्री कपिल मुनि मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश गौतम ने बताया कि मां कात्यायनी की जो मूर्ति स्थापित है, वह शायद ही पूरे भारतवर्ष में कहीं हो। उन्होंने बताया कि कलायत में जो मां कात्यायनी की मूर्ति हैं उसमें मां शेर के दोनों ओर पांव कर इस तरह विराजमान हैं जैसे घोड़े पर सवारी कर रही हो। उन्होंने बताया कि मां के पैरों में रिद्धी सिद्धी भी विराजमान हैं। मां के मंदिर में सैकड़ों वर्षों से अखंड जोत जल रही है और मंदिर का द्वार दक्षिण दिशा की ओर है। जिसका मतलब बाहर से आने वाली सभी मुसीबतें बाहर ही रह जाती हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के दिनों में पूजा करने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती हैं। बहुत से ऐसे श्रद्धालु भी हैं जो पूरे नवरात्र में व्रत रखकर मां की उपासना करते हैं। मंडी स्थित दुर्गा मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य राजेश मित्तल ने बताया कि मंदिर को भव्य ढंग से सजाया गया है और मंदिर में विशेष पूजा शुरू की जा रही है, जिसमें प्रति दिन एक यजमान आहुति देगा।
नवरात्रि का तिथियां :
10 अक्तूबर बुधवार प्रतिपदा व द्वितीया
11 अक्तूबर वीरवार तृतीया
12 अक्तूबर शुक्रवार चतुर्थी
13 अक्तूबर शनिवार पंचमी
14 अक्तूबर रविवार षष्ठी
15 अक्तूबर सोमवार सप्तमी
16 अक्तूबर मंगलवार अष्टमी
17 अक्तूबर बुधवार नवमी
18 अक्तूबर वीरवार दसवीं
यहां गौर करने वाली बात है कि विजय दशमी पर्व अपराह्नव्यापिनी दिनमान के चौथे पंचम भाग में व्याप्त अश्विन शुक्ल दसवीं को मनाया जाता है। इस वर्ष 18 अक्तूबर को 15 घं 29 मिं के बाद दसवीं विद्यमान है पर श्रावण नक्षत्र नहीं है। इस लिए विजय दशमी 19 अक्तूबर को मनाई जाएगी। देश के दक्षिण भाग में 18 को ही विजय दशमी मनाई जा सकती है।
उधर, राजौंद में भी नवरात्र को लेकर दुकानों पर चहल-पहल बढ़ गई है। मंगलवार को नगर के अधिकतर दुकानों पर नवरात्र से संबधित समान से दुकानों में खासी चहल पहल नजर आई। अधिकतर दुकानदारों ने नवरात्र शुरू होने से पहले ही व्रत व पूजा का सामान अपनी दुकानों पर जमा कर लिया।