न मैं कमजोर, न जयप्रकाश, क्षेत्र में राजनीतिक ताकत लाने के लिए एक हुए हम : सुरजेवाला
उत्तरी हरियाणा में सत्ता लाने के लिए सुरजेवाला कर रहे हैं सारी लीडरशिप को इकट्ठा
नसीब सैनी
कैथल। प्रदेश में कांग्रेस की ओर से सीएम बनने की दौड़ में शामिल अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला अपने साथ अधिक से अधिक विधायक जितवाकर अपनी लड़ाई मजबूत करने में जुटे हैं। यही कारण है कि राजनीति में करीब तीन दशक तक धुर विरोधी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं निर्दलीय विधायक जयप्रकाश भी अब साथ आ गए हैं। दोनों नेताओं ने आपसी मतभेद भुलाते हुए उत्तरी हरियाणा में राजनीतिक ताकत लाने का एलान किया है।
रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि न मैं कमजोर, न जयप्रकाश, क्षेत्र में राजनीतिक ताकत लाने के लिए एक हुए, कुछ बड़ा लेकर आएंगे बांगर की धरती पर। इसलिए एक हुए हैं। उत्तरी हरियाणा की लीडरशिप इकट्ठा होगी तभी तो ताकत आएगी।
सुरजेवाला वर्तमान में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में लगातार पैठ बढ़ाते जा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस का मीडिया प्रभारी तो बनाया गया ही है, साथ ही कांग्रेस संचालन करने वाली 9 सदस्यीय कोर कमेटी सहित कई कमेटियों का सदस्य बनाया गया है। जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित चुनिंदा कांग्रेसी नेता शामिल हैं। लेकिन सुरजेवाला केवल बड़े पदों के साथ-साथ जमीनी तौर पर अपनी ताकत मजबूत करने में जुटे हैं। हर शनिवार व रविवार को वे कैथल सहित कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, जींद व आस-पास के इलाकों में जनसभाएं कर उत्तरी हरियाणा की लीडरशिप को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब तक तीनों जिलों के कई हलकों में रैलियों का आयोजन कर चुके हैं। इसी कवायद के बीच कलायत क्षेत्र वे निर्दलीय विधायक एवं कैथल, नरवाना सहित प्रदेश के कई हलकों में अच्छी-खासी पैठ रखने वाले जयप्रकाश के साथ हाथ मिला लिया है। दोनों का विरोध अब तक जग जाहिर रहा है। कहा तो यह भी जा रहा था कि पिछले चुनाव में कलायत से जयप्रकाश की टिकट कटवाने के पीछे सुरजेवाला की अहम भूमिका थी। इस चर्चा पर स्वयं जयप्रकाश ने भी बात की। हालांकि अभी जयप्रकाश ने कांग्रेस ज्वाइन करने का एलान नहीं किया, लेकिन इशारा जरूर कर दिया कि वे इस बार निर्दलीय नहीं लड़ेंगे। जयप्रकाश ने कहा कि लंबे समय से यह कवायद चल रही थी। वकीलों ने अहम भूमिका निभाई तो क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए इकट्ठा हुए हैं।
कांग्रेस की सरकार आने पर सीएम बनने के लिए विधायकों के समर्थन की जरूरत रहती है। सुरजेवाला का प्रयास है कि उनके खेमे से कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, पंचकूला हो या अंबाला सहित करनाल व पानीपत तक से विधायक जीतें और सीएम बनने के लिए आवश्यक संख्या तक वे पहुंच सकें। कैथल, कलायत, पूंडरी, गुहला-चीका, थानेसर, लाडवा सहित कई हलकों में नेताओं को साथ जोड़ने के साथ वे कांग्रेस पार्टी की हवा बनाने के लिए भी प्रयासरत हैं। हर बार किसी न किसी नेता को अपने साथ जोड़ रहे हैं। जिससे लोगों को यह संदेश देने का भी प्रयास कर रहे हैं कि लोग कांग्रेस से जुड़ रहे हैं तो कांग्रेस की ही हवा बन रही है।
लोग कयास लगा रहे हैं कि सुरजेवाला कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन खुद सुरजेवाला ने इस चर्चा पर विराम लगाते हुए कहा कि वे कैथल को नहीं छोड़ेंगे। चुनाव लड़वाने का फैसला पार्टी हाईकमान करता है। लेकिन उनका व्यक्तिगत तौर पर ऐसा कोई फैसला नहीं है।