एक माह में हैफेड में चौथी एफआईआर, पांचवीं की तैयारी
पूर्व डीएम ने ऐसे मिलर्स को दे दी एनओसी, जो डिफाल्टर मिलों के थे गारंटर
धान की मिलिंग में भारी गड़बड़ी
16 करोड़ रुपये का नुकसान बता चुके हैं अधिकारी, अभी उन मिलों की भी गाड़ियां जमा होना बाकि, जिन्हें तय मानकों से ज्यादा दे दिया था धान
नसीब सैनी
कैथल। खरीद एजेंसी हैफेड में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही है। यही कारण है कि एक माह में एजेंसी की ओर से चौथी एफआईआर दर्ज करवाई गई है। जिसमें न केवल राइस मिल बल्कि एजेंसी के निवर्तमान डीएम के खिलाफ तो भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। अब पांचवीं एफआईआर की तैयारी की जा रही है। जिसमें एक राइस मिल द्वारा एजेंसी को करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की धान का चूना लगाए जाने का मामला दर्ज हो सकता है।
क्या है खरीद प्रक्रिया:-
खरीद एजेंसी हैफेड द्वारा अन्य एजेंसियों की तरह से धान के सीजन में किसानों से आढ़तियों के माध्यम से धान की खरीद की जाती है। इसके बाद इस धान को मिलर्स को दिया जाता है। इससे पूर्व मिलों का चयन किया जाता है। जिसमें उनके पिछले लेन-देन सहित उनसे गारंटर तक लिए जाते हैं। पिछले सीजन में सरकार ने मिलिंग की नई पॉलिसी घोषित की थी। जिसमें मिलर्स से गारंटी के लिए 5 लाख रुपये की एफडी देने की भी शर्त लगाई थी। ताकि मिलर्स डिफाल्टर न हो ओर नियमानुसार जो धान एजेंसी मिलर्स को देती है। उसमें से चावल बनाकर सरकार को जमा करवा दें।
डिफाल्टर मिलों के गारंटर्स को दी एनओसी, एजेंसी को भारी नुकसान:-
तीन मिलों द्वारा करोड़ों रुपये के धान के एवज में चावल जमा न करवाने पर हैफेड द्वारा मार्च माह के प्रथम सप्ताह में तीन एफआईआर दर्ज करवाई गईं। जिसमें मिलर्स पर धोखाधड़ी व विभाग की मिलिंग पॉलिसी के उल्लंघन के आरोप लगे। अब 27 मार्च को एक ओर एफआईआर दर्ज करवाई गई। जिसमें न केवल उन डिफाल्टर मिलर्स के गारंटरों को एनओसी जारी करने का खुलासा हुआ, जो डिफाल्टर हो चुके हैं। बल्कि 10 ऐसे राइस मिलों की जानकारी सामने आई, जिन्हें तय मानकों से अधिक धान पूर्व में अधिकारियों द्वारा दे दिया गया। इस धान में से अभी तक काफी मात्रा में चावल जमा करवाया जाना शेष है।
पिछले साल एजेंसी के अधिकारियों ने जीविशा फूड प्राइवेट लिमिटिड, गणपति राइस मिल, सतनाम राइस मिल कैथल, एकेएम फूड प्राइवेट लिमिटेड, किसान चावल मिल ढांड, गुर्जर राइस मिल ढांड, पंवार राइस मिल ढांड, मां सरस्वती राइस मिल चीका, तिलक राम चावल मिल चीका व पार्वती एग्रो इंडस्ट्रीज को तय मानकों से अधिक धान दिया गया। जिसमें से काफी मिलों की ओर अभी चावल जमा करवाया जाना शेष है।
एक ओर एफआईआर की तैयारी:-
एजेंसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक ओर मिल द्वारा करीब 2300 एमटी से ज्यादा धान खुद-बुर्द करने का मामला सामने आया है। जिससे एजेंसी को करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इस राइस मिल के खिलाफ भी धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज करवाए जाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि यदि यह मिल मालिक चावल जमा करवाने में तत्परता दिखाता है तो शायद एफआईआर से बच जाए।
मिलर्स के व्यवहार को लेकर जो भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उसके अनुसार कार्रवाई करवाई जा रही है। कुछ अन्य मिलों की भी अनियमितताएं सामने आई हैं। यदि नियमानुसार चावल जमा नहीं होते हैं तो ऐसे मिलों के खिलाफ भी कार्रवाई निश्चित है।
वीपी मलिक, डीएम हैफेड।