फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैथल में एक लाख 50 हजार एकड़ धान की पराली से पैदा हुआ लगभग 100 करोड़ का रोजगार

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल में एक लाख 50 हजार एकड़ धान की पराली से पैदा हुआ लगभग 100 करोड़ का रोजगार
विज्ञापन


नसीब सैनी
कैथल। आज हरियाणा व पंजाब में पराली जलाए जाने के नाम पर खूब बवाल मचा हुआ है। लेकिन कैथल में कृषि विज्ञान केंद्र से करीब सात साल पहले प्रशिक्षण लेकर शुरू हुए कारोबार ने आज करीब 100 करोड़ से अधिक का रोजगार पैदा किया है। अकेले कैथल में करीब 200 से 300 परिवार धान की पराली से चारा बनाकर बेचने के काम में जुटे हैं। जिससे न केवल किसानों को आय हो रही है, बल्कि इस काम में जुटे मजदूर, व्यापारी, दूसरे प्रदेशों में खरीदने वाले व्यापारियों को भी आय हो रही है। पराली जलाने की बजाए सूखा चारा बनाकर बेचना प्रदूषण की समस्या से निजात दिलवा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र कैथल द्वारा करीब सात-आठ साल पहले कुछ लोगों को पराली से सूखा चारा बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद पराली खरीद कर उसमें चारा बनाने के लिए टोका लगाया गया। टोके से पराली को काटकर चारा बनाते हुए बेचना शुरू किया।
विज्ञापन

जिले में करीब 60 हजार हेक्टेयर में बासमती धान का उत्पादन होता है। बासमती ग्रुप की धान की ही पराली बनती है। यदि इसमें से 50 हजार हेक्टेयर यानी 1 लाख 50 हजार एकड़ में उगाई गई धान की पराली भी किसान बेचते हैं तो लगभग 3000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इसकी कीमत ही 45 करोड़ रुपये बन जाती है। इसके बाद जो व्यापारी इस पराली को खरीद कर अपने ठिकाने पर लाएगा, उस जगह के लिए भूमि मालिक लगभग 40 से 50 हजार रुपये सालाना ठेका लेते हैं। अकेले कैथल जिले में कैथल शहर, पूंडरी, कैलरम गांव के आस-पास के एरिया सहित कई जगह बड़े टोके भी लगाए गए हैं। इन टोकों पर 200 से 300 परिवार प्रत्यक्ष तौर पर काम कर रहे हैं। जो पराली से चारा बनाते हैं। इस प्रक्रिया में खेत से पराली बेचने वाले किसान को, पराली खरीदकर लाने वाले व्यापारी को, टोके पर पराली से चारा काटकर बनाने वाले मजदूर को, वाहन में चारा भर कर ले जाने वाले वाहन चालक को, पराली डालने के लिए जगह देने वाले भूमि मालिक को, गंतव्य पर जाकर चारे को उतारने वाले मजदूर को और इस चारे का उपयोग करने वाले पशु मालिक तक के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इस तरह से अकेले कैथल जिले में लगभग 10 हजार से अधिक लोगों के निवाले में यह व्यवसाय मदद कर रहा है। कुल मिलाकर कृषि विज्ञान केंद्र के मोटे से अनुमान के अनुसार लगभग 100 करोड़ रुपये का रोजगार का अवसर इसके माध्यम से पैदा हो सका है।
राजस्थान व गुजरात के अलावा स्थानीय खपत भी बढ़ी है : पराली से चारा बनाकर गुजरात के अलावा लगभग पूरे राजस्थान में भेजा जा रहा है। पूर्व में लोग सीजन में ही अपनी पराली खरीद कर रख लेते थे, बाद में घर में ही उसका चारा बनाते थे। लेकिन अब स्थानीय स्तर पर भी लोग घर में ही चारा बनाने की बजाए अब पराली से बना-बनाया चारा खरीदने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर भी इस चारे की खपत बढ़ी है तो रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
जलाने की बजाए रोजगार के अवसर पैदा करें किसान : लगभग सात-आठ साल पहले यह काम शुरू करने वाले पार्षद वेदप्रकाश का कहना है कि किसान पराली जलाने की बजाए बेचें, ताकि रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। कैथल में हजारों परिवार अब पराली से अपना रोजगार चला रहे हैं। पराली के रिसाइकिल के और अवसर पैदा किए जाएं तो जलाने जैसी समस्या से पूर्ण रूप से मुक्ति मिल जाएगी।
सुरेश सेगा सहित कुल्तारण के गांधी ने कहा कि वे स्थानीय स्तर पर डेयरियों में सूखे चारे की सप्लाई करते हैं। जिससे उनके परिवार की रोजी-रोटी चल रही है। लेकिन इस काम में मेहनत बहुत ज्यादा है। आय उतनी ज्यादा नहीं है।
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि जिले में बासमती ग्रुप की लगभग 1 लाख 50 हजार एकड़ भूमि में पैदा होने वाली धान की पराली को अब बेचा जाने लगा है। जिससे हजारों परिवारों को रोजगार मिल रहा है। इसलिए किसान पराली जलाएं नहीं, इसका सदुपयोग करें। यदि कुछ और तकनीकी सहायता मिल जाए तो रिसाइकिल कर पराली का और भी काफी सदुपयोग हो सकता है।

जिले की डेयरियों में सूखे चारे की जरुरत सहित राजस्थान, गुजरात व दूसरे प्रदेशों में पराली का चारा बनाकर बेच रहे हैं लोग
अकेले कैथल जिले में करीब 200 से 300 परिवार जुटे हैं काम में
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 10 हजार से अधिक लोगों के रोजगार का साधन बन गई है पराली
पराली को जलाएं नहीं...नए रोजगार के अवसर पैदा करें
फोटो संख्या-29, 30, 31 व 32
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें