जाट महासभा ने यशपाल मलिक पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। आरक्षण आंदोलन के दौरान जमा हुए चंदे के हड़पने को लेकर जाट समाज में उठी चिंगारी की लपटें कलायत तक भी पहुंची। कलायत में जाट महासभा ने इस संदर्भ में पूर्व सैनिक कामरेड साधूराम कौलेखां की अध्यक्षता में एक बैठक की। बैठक के दौरान जाट महासभा के प्रधान सुभाष बड़सीकरी व पहलवान हवा सिंह दलाल ने यशपाल मलिक से जमा हुए चंदे की पाई-पाई का हिसाब लेने की बात कही। कामरेड साधू राम ने कहा कि आरक्षण आंदोलन के दौरान एक एक व्यक्ति न अपनी हैसियत से बढ़ कर चंदा दिया। यहां तक की आंदोलन के लिए महिलाओं ने अपने आभूषण तक बेच कर चंदा दिया। यशपाल मलिक ने जमा हुए चंदे में भारी सेंध लगाते हुए मोटी रकम को हड़प लिया। उन्होंने कहा कि मलिक ने केवल देश से ही नहीं बल्कि विदेशों तक से आए मोटे चंदे को डकार लिया है। उन्होंने पूछा कि यशपाल मलिक की गाजियाबाद स्थित ग्लोबल जाट मिशन के खाते में 296 करोड़ रुपये कहां से जमा हुए। हवा सिंह दलाल ने कहा कि मलिक बताएं की उन्होंने खुद व अशोक बल्हारा और बबला रईया ने आरक्षण आंदोलन के दौरान कितना चंदा दिया। इन लोगों ने एक भी पैसे का सहयोग नही किया उल्टे लोगों की गाढ़े खून पसीने की कमाई को खा गए। जब भी जाट समाज मलिक से चंदे का हिसाब मांगता है, तभी सांसद राजकुमार सैनी जाटों व चौधरी छोटू राम को अपशब्द कह कर जाट समाज का ध्यान चंदे के मुद्दे से भटका देता है। इसका मतलब है कि राजकुमार सैनी व यशपाल मलिक में सांठ गांठ है। मलिक के इरादे साफ हैं कि उन्होंने जाट हित से कुछ भी लेना देना नही है। यदि उन्हें थोड़ी भी हमदर्दी होती तो वे आरक्षण की लड़ाई छोड़ जाट सेवा संघ शुरू नही करते। मलिक पूरी तरह से सरकार के इशारों पर नाच रहे हैं। सुभाष बडसीकरी ने कहा कि जाट समाज ने जेलों में बंद जाट समाज के बच्चों की रिहाई कि लिए 55 दिन का धरना व करोड़ों रुपये चंदे के रूप में दिए थे न कि मलिक की जाट सेवा संघ के लिए। सूबे सिंह समैण व सुभाष बराला का नाम हाथापाई मुद्दे में घसीट कर मलिक चंद के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना चाहता है। बैठक में रामपाल सहारण, सुभाष बढ़सीकरी, रणदीप, दया सिंह, इंद्र सिंह, बलबीर, सतपाल, रघबीर सहित जाट समुदाय के अनेक लोग मौजूद रहे।