कैथल। अवैध कॉलोनियों के खेल में अब विजिलेंस की एंट्री हो चुकी है। विजिलेंस विभाग ने नगर परिषद और डीटीपी से पिछले 10 साल का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। नया टैंडर विजिलेंस की ओर से औपचारिक पत्र जारी किया गया है। इसमें पूछा गया है कि इस अवधि में कितनी अवैध कालोनियां काटी गईं, कितने कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए गए, कितनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और किन-किन पर क्या कार्रवाई अमल में लाई गई।
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन अवैध कालोनियों के विकास में नगर परिषद या डीटीपी की मिलीभगत रही। जब कोई अवैध कॉलोनी शुरू हुई तो क्या तत्काल कार्रवाई की गई या जानबूझकर देरी की गई, इन सभी बिंदुओं की तहकीकात जारी है।
रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद नगर परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। संबंधित शाखा से लेकर वरिष्ठ स्तर तक सभी अधिकारी दस्तावेज़ तैयार करने में जुट गए हैं। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जब किसी क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित होती है तो नगर परिषद की टीमें मौके पर जाकर निर्माण रोकने की कार्रवाई करती हैं और डीटीपी विभाग को सूचना देती हैं। अब इन्हीं कार्रवाइयों के क्रम की जांच की जा रही है। संवाद
विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि नगर परिषद से अवैध कालोनियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इस संबंध में उन्हें पत्र जारी कर जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। डीटीपी विभाग से भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।