पुलिस की तरफ से कार्रवाई में घायल साथी का उपचार करते किसान। संवाद
दातासिंह वाला बॉर्डर (जींद)। आंदोलनरत किसान दूसरे दिन भी दातासिंहवाला बाॅर्डर पर डटे रहे। बॉर्डर पर युवा आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं और बुजुर्ग किसान खाने-पीने की व्यवस्था संभाले हुए हैं। जगह-जगह लंगर लगाकर किसानों की सेवा करते नजर आए।
पिछले आंदोलन की तुलना में इस बार बॉर्डर क्रॉस करने के लिए किसानों के पास न तो जेसीबी है और न ही हाइड्रा मशीन। दूसरी ओर, पिछली बार की अपेक्षा प्रशासन पूरी तैयारी के साथ बॉर्डर पर डटा हुआ है। जहां दातासिंह वाला बॉर्डर पर कंटीली तार, बड़े-बड़े पत्थर, कंटेनर व भारी फोर्स तैनात है वहीं उझाना में भी नाका लगाकर प्रशासन पूरी तैयारी के साथ डटा हुआ है। वहीं नरवाना से जींद जाने वाले रास्ते को भी नरवाना के पास नाका लगाकर आवाजाही पूर्ण रूप से बंद कर दी गई है। नरवाना से लेकर दातासिंह वाला बॉर्डर तक गांव के लिंक मार्गों पर भी अवरोधक लगाकर आवाजाही रोक दी गई है।
घायलों का खुद ही उपचार कर रहे किसान
आंसू गैस के गोले लगने या प्लास्टिक की गोली लगने से जो किसान घायल हो रहे हैं, उनको तुरंत उठाकर ले जाते हैं और खुद ही उनका उपचार किया जाता है। बुधवार को पुलिस की तरफ से कार्रवाई में पांच किसान घायल हो गए थे। किसानों ने तुरंत दवा और मरहम पट्टी की। आंसू गैस से बचने के लिए किसानों ने मुंह पर दवा और आंखों में जलन न हो, इसके लिए स्पेशल चश्मे (स्विमिंग गॉगल) लगाकर खुद को बचाया।
पुलिस की तरफ से कार्रवाई में घायल साथी का उपचार करते किसान। संवाद