27जेएनडी14-लघु सचिवालय में बना जन स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय। संवाद
जींद। जन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब गांव-गांव जाकर पेयजल सप्लाई के पानी की गुणवत्ता जांच के लिए नमूने लेंगी और लोगों को पानी बचाने का संदेश देंगी। शहरी अमृत योजना के तहत जींद और नरवाना में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नमूने लेंगी और पाइपलाइन के लीकेज तथा अवैध कनेक्शनों की जानकारी भी जन स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करवाएंगी। यह काम एक मार्च से शुरू होगा। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का अगले साल 28 फरवरी 2025 का जन स्वास्थ्य विभाग के साथ अनुबंध रहेगा। महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांच के लिए एक दिन में 15 सैंपल, लीकेज और अवैध कनेक्शन के पांच-पांच सैंपलों की जानकारी एकत्रित करनी होगी। वहीं महीने में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 330 सैंपल, पानी लीकेज और अवैध कनेक्शनों का 110-110 सैंपलों का टारगेट निर्धारित किया गया है।
जींद में 30616 और नरवाना में 8982 कनेक्शन
जन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जींद में पानी के 30 हजार 616 और नरवाना में 8982 कनेक्शन हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक जींद में तीन और नरवाना में तीन महिलाओं ने योजना के तहत आवेदन जमा करवाए हैं। बता दें कि कई बार लोगों को शिकायत रहती है कि उनके यहां पीने का पानी खराब है या फिर लीकेज की दिक्कत है। कर्मचारियों की कमी के चलते जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समय रहते लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं करवा पाते। ऐसे में अब जन स्वास्थ्य विभाग स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर पानी के सैंपल लिए जाएंगे। लीकेज के बारे में पता लगाया जाएगा। इससे लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। वहीं महिलाएं अवैध कनेक्शन के बारे में जानकारी जुटाकर उन्हें वैध करवाने का काम करेंगी।
जिलावासियों को बेहतर पेयजल सुविधा देने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सहायता लेगा। समूह की सदस्य घर-घर जाकर पानी के सैंपल लेंगी। वहीं लीकेज के बारे में भी जानकारी देंगी। इसके बाद लीकेज को दुरुस्त किया जाएगा। वहीं जहां अवैध कनेक्शन हैं, उनका डाटा एकत्रित कर उन्हें वैध करवाया जाएगा। -रणधीर मताना, जिला सलाहकार, जन स्वास्थ्य विभाग जींद।
27जेएनडी14-लघु सचिवालय में बना जन स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय। संवाद