जींद/नरवाना। दातासिंह वाला बॉर्डर पर किसान आंदोलन का तीसरा दिन शांति के साथ बीता। वीरवार को काफी संख्या में महिला किसान भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंचीं और आंदोलन में भागीदारी का एलान किया। बॉर्डर पर वीरवारा को किसान और पुलिस फोर्स की ओर से सफेद झंडे लगाए गए थे। सफेद झंडे लगाकर दोनों तरफ से शांति की अपील की गई। वीरवार को दोनों तरफ से कोई गतिविधि नहीं हुई। किसानों ने पूरा दिन आराम किया। वीरवार सुबह ही किसानों ने सफेद झंडा फहराने के बाद अपनी तरफ कंटीली तार खींच दी थी। किसानों ने सभी से आह्वान किया कि कोई भी किसान कंटीली तार से आगे नहीं जाए। इसके अलावा पुलिस फोर्स की तरफ कोई भी पत्थर या छींटाकशी न करे।
वीरवार को विशेष बात यह रही कि आंदोलन में पहली बार बुजुर्ग किसान अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई दिए। इससे पहले यह बागडोर युवा किसानों ने संभाली हुई थी, लेकिन वीरवार को पूरा दिन बुजुर्ग किसानों ने शांति की अपील के साथ युवाओं को शांत रहने का आह्वान कर रहे थे।
पहली बार महिलाओं ने लिया आंदोलन में हिस्सा
किसान आंदोलन की शुरुआत हुए तीन दिन हो चुके हैं। दो दिन तक महिला किसान दिखाई नहीं दी थीं, लेकिन तीसरे दिन वीरवार को काफी संख्या में महिलाएं पहुंचीं और उन्होंने किसान आंदोलन में बराबर की भागीदार का एलान किया। महिलाओं का कहना है कि हर बार किसान को दबाया जाता है। किसानों से झूठे वादे कर बरगलाया जाता है, लेकिन इस बार किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों का आंदोलन और लंगर यूं ही चलता रहेगा। आंदोलन में पुरुषों के बराबर महिलाएं संघर्ष करेंगी।
आंदोलन में पहुंचे किसान नेता
दो दिन में किसान आंदोलन में कोई भी समिति या संगठन का नेता नजर नहीं आया था, लेकिन तीसरे दिन कई संगठनों के नेता आंदोलन में हाजिरी लगाई। कई नेताओं ने बयान देकर आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की। हरियाणा की तरफ से भी कई किसानों के जत्थे किसान आंदोलन में दिखाई दिए। वीरवार को आंदोलन में जत्थेदार बलदेव सिंह सरसा, सुनील बद्दोवाल, अभिमन्यु कोहाड़, होशियार सिंह खरल, सेलाराम धमतान जैसे किसान नेता पहुंचकर आंदोलन में शामिल हुए।