जींद। प्रशासन वैसे तो दावा करता है कि जुलाना विधानसभा क्षेत्र से बारिश के पानी की निकासी के सभी प्रबंध कर दिए हैं, किंतु हकीकत उलट है। प्रशासन की ओर से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करके पोली, पडाना, करेला व शामलो कलां में 24 घंटे 12 मोटरों से पानी निकाला जा रहा है। यह कार्य 21 जुलाई से लगातार जारी है। इसके अलावा अन्य 70 स्थानों पर भी अस्थायी रूप से पानी की निकासी की जा रही है। इसके बावजूद बराड़ खेड़ा व बुआना गांव की तीन हजार एकड़ फसल आज भी चार-चार फीट पानी में डूबी हुई है। दोनों गांवों में 1995 से फसलें डूब रही हैं। गांव की बाहरी कॉलोनियों में बने मकानों में भी पानी भरने से वह खाली हो चुके हैं। प्रशासन दावा करता है कि बरसाती पानी की निकासी इन प्रबंधों के जरिये आठ से दस घंटे में निकाला जा रहा है, कहीं भी पानी नहीं भरा है लेकिन बुआना व बराड़ खेड़ा गांव के लोग 27 सालों से पानी का दंश झेल रहे हैं।
पहले बराड़ खेड़ा गांव में बारिश का पानी भरता था तो लोग परेशान होते थे। 1995 में आई बाढ़ के समय बराड़ खेड़ा व बुआना के बीच लोहे ड्रम दबाए गए। बराड़ खेड़ा गांव निवासी पूर्व सरपंच बारूराम का कहना है कि इस साइफन से बराड़ खेड़ा का पानी बुआना की तरफ निकल जाता था। इसके बाद बुआना गांव में भी पानी भरने लगा और उन्होंने इस साइफन को बंद कर दिया। पिछले वर्ष इस साइफन को जब बराड़ खेड़ा गांव के लोगों ने खोलने का प्रयास किया तो दोनों गांवों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद यह साइफन बंद कर दिया गया। इस समय गांव की लगभग एक हजार एकड़ फसल पानी से डूबी हुई है। वहीं बुआना गांव के पूर्व सरपंच बलबीर सिंह का कहना है कि उनके गांव में पहले भी बहुत अधिक पानी हो गया है। गांव की लगभग दो हजार एकड़ में तीन से चार फुट पानी खड़ा है। यहां सारी फसलें खत्म हो चुकी हैं लेकिन प्रशासन ने पानी निकासी का कोई इंतजाम नहीं किया। खेतों से पानी निकासी के लिए आठ इंची एक पाइप दबाया हुआ है, जिससे पानी की निकासी नहीं हो रही है।
मोरखी और भिड़ताना के लोग भी झेल रहे परेशानी
गांव मोरखी व भिड़ताना गांव के लोग भी पिछले दस साल से फसल बर्बादी का दंश झेल रहे हैं। दोनों गांवों की सीमा पर लगभग 500 एकड़ फसल चार से पांच फीट पानी में डूबी हुई है। इस पानी की निकासी का भी कोई प्रबंध नहीं है। गांव में भी पानी घुस चुका है। गांव भिड़ताना निवासी बागा, राममेहर, काला, नन्हा, विजेंद्र, राजेश, सुलतान, सियाराम, बिट्टू ने बताया कि उनके खेत बाकी खेतों से थोड़े गहराई वाले एरिया में हैं। जब भी ज्यादा बारिश होती है तो गांगोली गांव के खेतों तक का पानी यहां आता है। इस कारण इस क्षेत्र में फसल हर बार लगभग चार से पांच फुट पानी में डूब जाती है। कुछ लोग खुद मोटर लगाकर पानी निकालते हैं लेकिन यह काफी नहीं होता। ग्रामीणों ने स्पेशल गिरदावरी करवाकर फसल के मुआवजे की मांग की है।
पिछले वर्ष गेहूं की की बिजाई भी नहीं हो पाई
बराड़ खेड़ा, बुआना, भिड़ताना व मोरखी गांव के लोग हर वर्ष प्रशासन से इस पानी की निकासी की मांग प्रशासन से करते हैं लेकिन फिलहाल कोई समाधान नहीं हो रहा। बहुत खर्च करने के बाद फसल लगाई जाती है लेकिन पानी में हर बार डूब जाती है। ऐसा भी मुनासिब नहीं है कि वह फसल की बिजाई नहीं करें। पिछले वर्ष तो गेहूं की फसल की बिजाई भी नहीं हो पाई थी।
गांव में घुसा पानी, नहीं हो रहा समाधान
निडानी गांव में घरों में भी पानी घुस चुका है। काफी लोग अपने मकान छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं। गांव निडानी निवासी जनसेवा समिति के प्रधान रमेश, रामदिया, रोशन ने बताया कि हर वर्ष गांव की बाहरी बस्ती में पानी घुस जाता है। हर वर्ष वह पानी निकासी के लिए डीसी को ज्ञापन देते हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। गांव के लोग पानी घुसने पर अपने घरों को छोडने पर मजबूर हो जाते हैं तथा अन्य मकानों में शरण लेते हैं।
बराड़ खेड़ा तथा बुआना के बीच साइफन को लेकर कुछ विवाद है। इसके बावजूद पानी निकासी के प्रबंध किए जा रहे हैं। अधिकारियों को भी दोनों गांवों से पानी निकासी के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पानी निकासी के स्थायी समाधान किए जाएंगे। भिड़ताना, मोरखी व निडानी गांव से भी पानी की निकासी की जा रही है।
-डॉ. मनोज कुमार, डीसी। ।
भिड़ताना गांव के खेतों में भरे बरसाती पानी से निकलते किसान। संवाद- फोटो : Jind
गांव बुआना में घुसा बरसाती पानी। संवाद।- फोटो : Jind