जींद। विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने कहा कि शिक्षा विकास की पहली सीढ़ी है। शिक्षा के बिना किसी समाज, देश या व्यक्ति का उत्थान संभव नहीं है। भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने शिक्षित होने का मूल मंत्र दिया, जिससे हर समाज आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देश के लिए एक समृद्ध और उत्तम संविधान की रचना की। वे समृद्ध भारत के शिल्पकार थे। डॉ. आंबेडकर महान समाज सुधारक थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा निम्न वर्ग के कल्याण के लिए सबसे अधिक कल्याणकारी नीतियां लागू की जा रही हैं। संत-महापुरुषों की जयंती सरकारी स्तर पर आयोजित की जा रही हैं। ताकि आमजन उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें। वे रविवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर की 132वीं जयंती पर संत कबीर धर्मशाला एवं कल्याण सभा जींद की ओर स आयोजित संत कबीर धर्मशाला के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
विकास एवं पंचायत मंत्री ने धर्मशाला के निर्माण के लिए 11 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अपने विचारों से अपने समय में गरीब और अमीर के बीच बनी खाई को पाटने का काम किया। उन्होंने निम्न वर्ग को मुख्य धारा में शामिल करने के लिए क्रांति की अलख जगाई। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अपने समय में देश के सबसे शिक्षित व्यक्ति थे। वे दूरदर्शी थे और देश के संविधान का निर्माण करने का कार्य उनको सौंपा गया, जिसको उन्होंने बखूबी निभाया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने विकट और विषम परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने देश को सर्वोपरि रखा।
शिक्षा लेने के लिए संसाधनों का अभाव नहीं
विकास एवं पंचायत मंत्री ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा हासिल करने के लिए संसाधनों का अभाव नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को उच्च शिक्षित बनाएं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सबका साथ-सबका विकास और हरियाणा एक-हरियाणवी एक की विचारधारा को लेकर प्रदेश में समान रूप से नीतियां लागू कर रही है। अंत में मुख्यातिथि ने समाजसेवी एवं शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। जींद के मानव को सैनिक स्कूल रेवाड़ी में चयन होने पर भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा, जींद के डीएसपी रवि खुंडिया, सतबीर, प्रधान राजेंद्र कुमार इंदौरा, सूबे सिंह, नेतराम डाबला, जोगीराम खुंडिया, रमेश सोलंकी, रोशन लाल, कृष्ण दुग्गल, महेन्द्र नागर, महावीर सिंह मौजूद रहे।