जींद। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राशन डिपो पर हर गांव में स्टेशनरी बेचने की योजना शुरू करने के लिए डिपोधारकों से सहमति मांगी थी। इसके लिए जिले के 545 में से 141 डिपोधारकों ने स्टेशनरी बेचने के लिए सहमति जताई थी। इन डिपोधारकों के नाम की सूची बनार विभाग ने मुख्यालय भेज दी थी। डिपोधारकों को उम्मीद थी कि इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी, मगर योजना कागजातों में ही अटकी हुई है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को अक्तूबर में मुख्यालय की तरफ से निर्देश मिले थे कि डिपोधारकों की आमदनी बढ़ाने के लिए स्टेशनरी का सामान उपलब्ध करवाया जाए, ताकि बच्चों को स्टेशनरी का सामान लेने के लिए दूर न जाना पड़े और बाजार व दुकानों से कम दाम पर मिल सके। इसमें स्टेशनरी का हर सामान सरकार की ओर से डिपोधारकों को उपलब्ध करवाया जाना है। इसमें विद्यार्थियों के लिए पेन-पेंसिल, इरेजर, नोटबुक, डायरी, रजिस्टर, स्केल समेत व अन्य की सूची दी गई थी। स्टेशनरी का सामान रखने पर डिपो पूरा महीना खुला रहेगा। इससे उपभोक्ताओं को राशन लेने में कोई दिक्कत नहीं रहेगी। जब भी उपभोक्ता को राशन लेने का समय मिले डिपो जा सकता है। इसके चलते जिले के 141 डिपोधारकों ने स्टेशनरी लेने के लिए विभाग को सहमति दी थी। संवाद
मुख्यालय को रिमाइंडर भेजा
डिपोधारक को स्टेशनरी का सामान बेचने के लिए पत्र लिखा गया था। 141 डिपोधारकों ने इसके लिए सहमति दर्ज करवाई थी। जिन्होंने स्टेशनरी का सामान बेचने के लिए सहमति जाई थी, उनके डिपो पर सामान भिजवाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा था, इसके बावजूद अब तक स्टेशनरी का सामान नहीं पहुंचाया गया। अब दोबारा से रिमाइंडर भेजा जाएगा, ताकि जिले के राशन डिपो पर यह योजना शुरू हो सके। -निशांत राठी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी जींद।
11जेएनडी09: निशांत राठी।