जींद। नई अनाजमंडी में अपनी फसल बेचने के लिए आने वाले किसानों को गेहूं के सीजन में भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मंडी में लगाए जा रहे शेड का कार्य अक्तूबर तक पूरा होने की संभावना है। अप्रैल में गेहूं का सीजन होता है, ऐसे में किसानों को गेहूं भी खुले आमसान के नीचे ही उतरना पड़ेगा। बरसात के कारण किसानों को परेशानी आ सकती है। तीन करोड़ नौ लाख रुपये से अनाजमंडी में शेड का निर्माण करवाया जा रहा है।
नई अनाज मंडी में जो दो बड़े शेड मंडी की स्थापना के समय लगाए गए थे, वह जर्जर हो गए थे। नई अनाज मंडी 1990-1991 में विकसित हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इसका उद्घाटन किया था। उस समय नई अनाज मंडी में दो बड़े-बड़े शेड लगाए गए थे। यह शेड मंडी में आने वाली किसानों की गेहूं और धान की फसल को बारिश तथा खराब मौसम से बचाने के लिए लगाए गए थे। समय बीतने के साथ मंडी के शेड जर्जर होते हो गए। इस कारण इन्हें पिछले साल कंडम घोषित कर उनकी जगह नए शेड लगाने की योजना बनी थी।
तीन करोड़ नौ लाख रुपये होंगे खर्च
नई अनाज मंडी में तीन करोड़ नौ लाख रुपये की लागत से नए शेड का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने पिछले साल टेंडर जारी कर ठेकेदार को वर्क अलॉट कर दिया था। ठेकेदार ने नई अनाज मंडी में शेड निर्माण का काम शुरू कर दिया है। अक्तूबर महीने तक नई अनाज मंडी में नए शेड लगकर तैयार हो जाएंगे। उसके बाद किसानों को इस साल अपनी धान की फसल खुले आसमान के नीचे नहीं डालनी पड़ेगी, लेकिन गेहूं की फसल इस बार खुले आसमान के नीचे डालनी पड़ेगी।
मंडी में शेड निर्माण का काम चल रहा है। मंडी में शेड बेहद जरूरी हैं। धान और गेहूं की फसल की आवक के समय बारिश से फसल को बचाने के लिए शेड जरूरी हैं। अक्तूबर तक शेड लगाने का कार्य पूरा हो जाएगा।
-संजीव जांगड़ा, सचिव मार्केट कमेटी।