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आठ गांवों में होगा सीधा मुकाबला, सरपंच पद के लिए 208 उम्मीदवार मैदान में

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जींद। पंचायती चुनाव को लेकर सफीदों हलका के आठ गांवों में सीधा मुकाबला होगा। इनमें आफताबगढ़, छापर, जयपुर, खरकड़ा, मलिकपुर, निमभनाबाद, रामपुरा और सरफाबाद गांव शामिल हैं। इसके अलावा 42 गांवों में दो नवंबर को मतदान होगा। इसको लेकर मतदाताओं ने पूरा जोर लगाया हुआ है। वहीं नया गांव, बड़ौद और पाजू खुर्द गांव में ग्रामीणों ने अपने-अपने सरपंच चुन लिए हैं।
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नया गांव में अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए सरपंच पद आरक्षित था, जिसको लेकर ग्रामीणों ने रीना रानी को सर्वसम्मति से गांव की सरपंच चुन ली गई। इसके अलावा बड़ौद गांव में सामान्य वर्ग के पुरुष के लिए सरपंच का पद आरक्षित था, जिसमें ग्रामीणों ने राकेश कुमार को सर्वसम्मति से सरपंच नियुक्त कर लिया जो कि गांव में परचून की दुकान चलाता है। पाजू खुर्द गांव में सरपंच का पद सामान्य वर्ग के पुरुष के लिए आरक्षित हुआ था, जिसमें ग्रामीणों ने निरंजन को सर्वसम्मति से सरपंच चुन लिया। ऐसे में तीन गांवों के लोगों ने भाईचारे को प्राथमिकता देते हुए अपने-अपने सरपंच बना लिए।
सफीदों हलके में सरपंच पद के चुनाव को लेकर 208 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 110 पुरुष और 98 महिलाएं हैं। इनमें अनुसूचित जाति से 43 पुरुष, बीसी वर्ग से 17 और सामान्य वर्ग से 50 पुरुष उम्मीदवार बने हुए हैं। महिलाओं में अनुसूचित जाति वर्ग की 24, बीसी वर्ग की 24 और सामान्य वर्ग की 50 महिलाएं उम्मीदवार बनी हुई हैं। सरपंच चुनाव में खास बात यह है कि बागड़ू कलां गांव में सबसे ज्यादा 13 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा सिल्लाखेड़ी गांव में 11, रत्ताखेड़ा में 11, बसीनी में आठ, साहनपुर में 8 और सिंघपुरा गांव में सरपंच पद को लेकर 8 उम्मीदवार बने हुए हैं।
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पाजू खुर्द में परचून की दुकान चलाने वाला बना सरपंच
पाजू खुर्द के लोगों ने पहली बार गांव में सर्वसम्मति से सरपंच बनाया है। गांव 140 साल पहले बसा था। जब से सरपंच बनते आ रहे हैं, तभी से वोटों के माध्यम से ही सरपंच बने हैं। सरपंच पद को लेकर हर बार कांटे की टक्कर होती थी, जिससे लड़ाई-झगड़ा भी होता था। सरपंचों चुनाव में हार-जीत का फैसला हर बार 8-10 वोटों का ही अंतर होता था। इस बार ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से सरपंच बनाने का निर्णय लिया और गांव में परचून की दुकान चलाने वाले निरंजन को ही सर्वसम्मति से सरपंच चुन लिया।
दसवीं पास रीना को सर्वसम्मति से चुना
नया गांव सिवानामाल में इस बार सरपंच पद अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था, जिसमें दसवीं पास महिला रीना रानी ने आवेदन किया, लेकिन गांव के लोगों ने इस बार सर्वसम्मति से सरपंच बनाने का फैसला लिया, जिसमें रीना रानी को सर्वसम्मति से सरपंच चुन लिया गया। हालांकि पहले भी एक बार महिला को सर्वसम्मति से सरपंच बनाया जा चुका है। अब दूसरी बार फिर गांव में भाईचारे की पंचायत बनी है, जिससे ग्रामीणों को गांव का बेहतर विकास करवाने की उम्मीद है।
ब्राह्मण बाहुल्य गांव बड़ौद में हुई सरपंच पद पर सर्वसम्मति
बड़ौद गांव जो कि ब्राह्मण बाहुल्य गांव है। इसमें पहली बार सर्वसम्मति से सरपंच बना है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से राकेश कुमार को सरपंच नियुक्त कर दिया है। पिछली बार नवनियुक्त सरपंच राकेश की पत्नी निशा रानी ब्लॉक समिति की चेयरमैन थी। राकेश के पिता कीमती लाल लगातार 20 साल सरपंच रह चुके हैं। इन्हीं बातों को लेकर ग्रामीणों ने इस बार कीमती लाल के बेटे राकेश पर सर्वसम्मति जाहिर करते हुए उनको सरपंच पद का भार सौंप दिया है।
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