09जेएनडी25: साध्वी लब्धि प्रभा ठाणे-3। संवाद
उचाना। तेरापंथ भवन में चल रहे चातुर्मास में साध्वी लब्धि प्रभा ठाणे-3 ने कहा कि शिक्षक, चिकित्सक, संत और शासक पथ भ्रष्ट नहीं चाहिए। वरना समाज का स्वास्थ्य, देश की सेहत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। यदि संतों की इच्छाशक्ति और शासक की कार्यशक्ति एक हो जाए तो देश की तस्वीर बदल सकती है। टोपी ढकने से कभी सत्य नहीं छिपता। एक बार कबीर ने किसी से पूछा सत्य और झूठ में कितना फर्क है। कबीर ने कहा चार इंच। शिष्य ने फिर पूछा वो कैसे, कबीर ने समझाया आंख और कान में चार इंज का ही तो फर्क है। जो कान में सुनाई पड़े वह झूठ और जो आंख से दिखाई पड़े वह सच। आज हमारी जिंदगी कानों से चल रही है। किसी विषय में जो कुछ भी सुनते है उसे परम सत्य मान बैठते है। कुदरत ने हमें दो आंखे भी दी है। यह देखने के लिए कि सुना हुआ सत्य है या नहीं। उन्होंने कहा कि जो इंसान अपनी आने वाली पीढ़ी को संस्कारित नहीं करता उसे उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।