जींद। केंद्र सरकार की ओर से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को सम्मान और नई पहचान देने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट सहायता, ऋण और उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग व मार्केटिंग में सहयोग दिया जा रहा है। डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने पात्र कारीगरों से योजना के तहत पंजीकरण करवाकर लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। पात्र आवेदक कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से मोबाइल सत्यापन और आधार ई-केवाईसी कर पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। योजना के तहत तीन लाख रुपये तक का बिना गारंटी ऋण, 15 हजार रुपये तक की टूलकिट सहायता और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन 500 रुपये स्टाइपेंड का भी प्रावधान है। इसके अलावा कारीगरों के उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में सहायता दी जाती है। संवाद