जींद। ढाठरथ के एनएस कॉन्वेंट स्कूल के निदेशक अजीत आर्य का पेड़-पौधों से खास लगाव है। वह अपने स्कूल में फूल और छायादार के अलावा फल देने वाले पौधे भी खुद तैयार करते हैं। उनके द्वारा चार साल पहले लगाए गए पौधे अब फल देने लगे हैं। उन्होंने चार साल पहले अपने स्कूल के बगीचे में मौसमी के पौधे लगाए थे, जो अब फल देने लगे हैं। इन पौधों पर अब डेढ़ से दो किलोग्राम (किग्रा) के मौसमी लगे हैं। इनको देखकर हर कोई अचंभित है, क्योंकि इतने बड़े-बड़े मौसमी शायद ही कहीं देखे हो। यह मौसमी दिखने में जितने बड़े हैं। इनका जूस उतना ही स्वादिष्ट है। एक मौसमी में इतना जूस निकलता है, जितना 10-12 मौसमी के फलों में निकलता है।
स्कूल निदेशक अजीत आर्य ने चार साल पहले एक नर्सरी से मौसमी का पौधा लिया था, जिसको उन्होंने अपने बगीचे में लगा दिया था। उसके बड़ा होने पर उन्होंने पौधे से कलम तैयार कर ली और उन्होंने उन कलमों को भी बगीचे में लगा दिया। उनमें से कई पौधे सुख गए, लेकिन एक पौधा अब बड़ा हो गया है। अब यह पौधा फल भी देने लगा है, जिस पर सामान्य से बड़े मौसमी लगे हुए हैं। अब इस पौधे से भी कलम तैयार की गई है, जो बारिश के चल रहे मौसम में लगाई जानी है। अजीत आर्य स्कूल की छुट्टी होने के बाद अपना समय पौधों को देते हैं। वह फूल वाले पौधों को प्रतिदिन पानी देते हैं और उसके बाद बगीचे में उगाए गए फलदार पौधों की देखभाल करते हैं। वह घर जाने की बजाय पूरा समय अपने बगीचे में ही लगाते हैं, जहां वह छोटे-बड़े पौधों की छंटाई, निराई करते हैं।
अजीत आर्य बताते हैं कि उनका पेड़-पौधों की तरफ शुरू से ही रुझान है। पेड़-पौधों के साथ समय बिताना उनकी दिनचर्या में शामिल है। उनके द्वारा लगाए गए मौसमी के पौधे अब फल देने लगे हैं। मौसमी फल का वर्जन भी डेढ़ से दो किलोग्राम तक है। मौसमी के पेड़ से वह कलम बनाकर मौसमी की नर्सरी तैयार कर रहे हैं।